भारतीय किसान नेता सहजानंद सरस्वती (Sahjanand Saraswati ) का आज महाप्ररायण दिवस है। 26 जून 1950 के दिन हीं इनका महाप्रयाण बिहार के मुजफ्फरपुर में जमींदारी प्रथा के खिलाफ लड़ते हुए हुआ था। स्वामी सहजानंद सरस्वती का जन्म मुल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला गाजी पुर के गॉव देवा में 22 फरवरी 1889 में एक किसान परिवार में हुआ था।

नौरंग राय से सहजानंद सरस्वती बनने का सफर

सहजानंद सरस्वती (Sahjanand Saraswati ) का असली नाम नौरंग राय है। उनका जन्म भूमिहार समाज से तालुक रखनेवाला परिवार में हुआ। उनेक पिता का नाम बेनी राय था वे मुल रूप से कृषि पेशे से जुड़े हुए थे। जब नौरंग राय 3 वर्ष के थे तो इनकी माता का देहानंत होगया था। माता के देहांत के बाद इनका लालन-पालन इनकी चाची नें की। नौरंग राय के भटकाव की स्थिति को देखते हुए साल 1905 में इनकी शादी करवा दी गई। शादी के एक वर्ष बाद हीं इनकी पत्नी का देहांत होगया। पहली पत्नी के मृत्यु के बाद परिवार चाहता था कि नौरंग राय दुबारा वैवाहिक जीवन जीने के लिए शादी करे। परिवार के इस दबाव से विरक्त नौरंग राय विद्रोह कर परिवार, रिश्तेदार और समाज की परवाह किये बिना शादी से मना कर दिया और भागकर काशी चले गये। काशी में आदि शंकराचार्य की परंपरा के स्वामी अच्युतानन्द से दीक्षा लेकर संन्यासी बन गए। बाद के दो वर्ष उन्होंने तीर्थों के भ्रमण और गुरु की खोज में बिताया। 1909 में पुन: काशी पहुंचकर दंडी स्वामी अद्वैतानंद से दीक्षा ग्रहणकर दंड प्राप्त किया और दंडी स्वामी सहजानंद सरस्वती बने।

जब ब्रह्मणों ने दंड धारण करने पर सवाल

जब नौरंग राय दंड धारण करके सहजानंद सरस्वती ( Sahjanand Saraswati ) बने तो समाज में फैली जातिवाद उन्हें भी नहीं छोड़ा।
दरअसल काशी के कुछ ब्रह्मों ने उनके संन्यास पर सवाल उठा दिया। उनका कहना था कि ब्राह्मणेतर जातियों को दंड धारण करने का अधिकार हीं नहीं है। स्वामी सहजानंद ने इसे चुनौती के तौर पर लिया और विभिन्न मंचों पर शास्त्रार्थ कर ये प्रमाणित किया कि हर योग्य व्यक्ति संन्यास ग्रहण करने की पात्रता रखता है।
अपने साथ हुए भेदभाव से आहत सहजानंद सरस्वती नें भूमिहार-ब्रह्मण परिचय नामक ग्रंथ लिखा जो आगे चलकर ब्रह्मषि वंश विस्तार के नाम से सामने आया। संन्यास के उपरांत उन्होंने काशी और दरभंगा में कई वर्षो तक संस्कृत साहित्य, व्याकरण, न्याय और मीमांसा का गहन अध्ययन किया। साथ-साथ देश की सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों का अध्ययन भी करते रहे।

 

international youth day

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international youth day : अक्सर हर राजनीतिक मंच पर युवाओं की भागीदारी की बात हमसब सुनते हैं। युवाओं की भागीदारी की बात हो भी क्यों न किसी भी राष्ट्र के निर्माण की रीढ़ युवा हीं तो हैं। भारत जैसे विकासशील देश की जमापूँजी है युवा । मानव संसाधन के सबसे कार्यशील पूँजी के बल पर हीं तो भारत विकसित देशों की श्रेणी में जाने का सपना देख रहा है। हालांकि लगातार दो लॉकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की टुटी रीढ़ पर बहस का दिन नहीं है लेकिन लॉकडाउन के कारण छीने गए रोजगार की चर्चा से युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ तो है। युवाओं के हाथ काम हो तो यह संसाधन सर्वश्रेष्ठ है लेकिन काम के अभाव हो तो भटकना आम बात है मसलन अपराधी गतिविधियों की ओर झुकाव होने लगता है। खैर अंतराष्ट्रीय युवा दिवस पर आइए हम यह जाने है कि  आखिर 12 अगस्त को युवा दिवस कब से मनाया जा रहा है और क्यों मनाते हैं।

साल 2000 से मनाया जा रहा युवा दिवस 

साल 1985 को पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से अंतरराष्ट्रीय युवा  वर्ष घोषित कर युवाओं को केंद्र में लाने की कोशिश की गई। इसके बाद साल  1999 के 17 दिसंबर को यह फैसला किया गया की हर साल 12 अगस्त को अंतराष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जायेगा।   अंतरराष्ट्रीय युवा वर्ष के ठीक 15 साल बाद साल 2000 से 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस  ( International Youth day  ) मनाने की परंपरा शुरू हुई। परंपरा का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ साथ सामाजिक कार्यों के प्रति युवाओं को प्रेरित करना एंव वैज्ञानिक कार्यों से जुड़े युवाओं को सम्मानित करना है।

यह है 2021 के युवा दिवस का थीम

हर साल 12 अगस्त को मनाये जाने वाले  अंतरराष्ट्रीय  युवा दिवस( International Youth day ) के लिए अलग अलग थीम का चयन किया जाता है। थीम के इर्द गिर्द हीं अलग अलग देश समाज के सबसे क्रियाशील मानव संसाधन के विकास के की योजना बनाते हैं । साल 2021 में मनाये जा रहे युवा दिवस का थीम है ट्रांसफॉर्मिंग फूड सिस्टम : यूथ एनोवेशन फॉर ह्यूमन एंड प्लेनेटरी हेल्थ  ।

 

 

 

 

SOLAR STROM

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Solar Strom Impact : सोंचिये सुबह सुबह उठें और न आपका मोबाई टावर काम करे न हीं जीपीएस जिससे लोकेशन के बारे में जानकारी मिलता हो तो क्या होगा? आप सोंच रहें होंगे के इतनी उटपटांग बात सोंचा हीं क्यों जाये ? यदि ऐसा मन में ख्याल आरहा है तो मैं बताता हूं आखिर होने क्या जा रहा है जिसकी वजह से हम सब को यह सोंचनी चाहिए।  दरअसल अनंत खगोलीय घटनाक्रम से हर रोज गुजर रहे ब्रह्मांड से एक सोलर स्टॉर्म बहुत तेजी के साथ धरती की ओर बढ़ता चला आरहा है। सूरज से उठे इस स्टॉर्म या तूपान को धरती की ओर बढ़ने की रफ्तार 1.6 लाख किलो मीटर प्रतिघंटा बताया जा रहा है। इसे 11 या 12 जुलाई को धरती से टकराने की संभावना जतायी जा रही है। इस वजह से धरती पर रहने वाले मानव के लिए यह दो दिन बेहद अहम होने वाला है।

क्या होने वाला है सोलर स्टॉर्म  का प्रभाव (Solar Strom Impact ) ?

आप सोंच रहे होंगे की सोलर स्टॉर्म ( Solar Strom Impact ) का प्रभाव क्या परने वाला है हम सब के उपर । आपको बता दें कि सोलर स्टॉर्म के दौरान धरती की सतह पर तेज बिजली की धारा का प्रवाह होगा। इसके चलते कई बार पावर ग्रिड तक फेल हो जाती हैं। कुछ जगहों पर तेल और गैस की पाइपलाइनों पर भी इनका असर दिख सकता है। इसका असर हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो कम्यूनिकेशन पर होने से जीपीएस वगैरह भी काम करना बंद कर सकता है । जब सोलर स्टॉर्म के धरती से टकरा रही होगी तो  इससे  खूबसूरत रोशनी निकलेगी। इस रोशनी को उत्तरी या दक्षिणी पोल पर रह रहे लोग रात के वक्त देखा जा सकेगा। ऐसी संभावना है कि सौर्य तूफान आता है तो धरती पर जीपीएस, मोबाइल फोन और सैटेलाइट टीवी के साथ ऐसे रेडियो फ्रीक्वेंसी से चलने वाले अन्य उपकरणों काम करना भी बंद सर सकता है।

ramvilsah with family

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Ramvilash Paswan life : लोजपा के अंदर चल रहा सियासी घमासान अब घर से बाहर सबके सामने है। रामविलास के छोटे भाई और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस चिराग से बगावत कर सांसदों को अलग कर पार्टी पर दावा ठोक रहे हैं। चिराग और पारस की लड़ाई की जड़ हर कोई जानना चाह रहा है। जब रामविलास पासवान अस्पताल में भर्ती थे तभी से पशुपति पारस पर पार्टी तोड़ने की कोशिश का आरोप चिराग मढ़ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रामविलास की बेटियाँ मृत्युशैया पर मौजूद अपने पिता से मिल तक नहीं पाई थी। नहीं मिलने की वजह कोई और नहीं चिराग पासवान की अपनी माँ रीना शर्मा थी।

पासवान की हैं दो पत्नियाँ, एक महल तो एक झोपड़ी में

रामविलास पासवान जिंदगी भर ( Ramvilash Paswan life ) वैसे तो राजनीति में मौसम वैज्ञानिक रहे हैं।  इनका जन्म जामुन पासवान और सिया देवी के घर पर हुआ जो बिहार के खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव में रहने वाला एक दलित परिवार था। पासवान ने कोसी कॉलेज, पिल्खी और पटना विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक और मास्टर ऑफ़ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है। इनकी पहली शादी साल 1960 के दशक में राजकुमारी देवी से हुई थी। उनकी पहली पत्नी से दो बेटियां, उषा और आशा हैं। 1969 से राजनीतिक मुकाम के बुलंदियों को छुने में लगे रामविलास पासवान शादी के तकरीबन 25 साल बाद 1983 में रीना शर्मा से शादी की जो एक एयरहोस्टेस  थीं और अमृतसर से पंजाबी हिंदू ब्रह्मण परिवार से हैं।  रीना शर्मा से एक बेटा चिराग और एक बेटी निशा है। उनके बेटे चिराग पासवान नेता से पहले एक अभिनेता रह चुके हैं।

रोती रहीं पहली पत्नी की बेटी नहीं पसीजा छोटी मां का दिल

रामविलास पासवान की पहली पत्नी आज भी गरीबी की हालत में पासवान के पैतृक घर पर रहने के लिए मजबूर है वहीं रीना शर्मा और उनके पुत्र चिराग पासवान रामविलास के आलिशान बंगले में। पिछले साल जब रामविलास ने अंतिम सांस ली तब  से परिवार की लड़ाई और अंतर्कलह लगभग सबके सामने आने लगा था। रामविलास पासवान की बड़ी पत्नी राजकुमारी देवी की बेटी  आशा पासवान ने मीडिया के सामने आपबीती सुनाई थी कि रामविलास की बीमारी की हालत में रीना शर्मा बेटियों को मिलने तक नहीं दी थी। वे बिलख कर रोते हुए कह रही थीं कि हमलोग पिता से मिलने के लिए हवाई टिकट का जुगाड़ भी कर लिए थे लेकिन छोटी मम्मी( रीना शर्मा) अंतिम समय में यह कह कर आने से मना किया था कि कोरोना का समय है यहां आने की कोई जरूरत नहीं है।

रामविलास नहीं रहे लेकिन चिराग के अलावा कोई और भी नहीं

रामविलास पासवान का निधन पिछले साल 6 अक्टूबर को हीं हो चुका है। पासवान ने दो शादियाँ की,  राजकुमारी देवी ( दलित) और रीना शर्मा ( ब्रह्मण)  से। दोनों शादियों में चार बच्चे हुए लेकिन बेटा एक मात्र चिराग। लिहाजा रामविलास ने चिराग को हीं आगे बढ़ाना सही समझा। आखिर पितृसतात्मक समाज में पिता के बाद पुत्र हीं तो होता है। हाँ, भाईयों को संभालने के अलावा बड़ी पत्नी की बेटियों को भी संभाले होते तो चिराग लेकर घुमने वाला कोई तो होता। फिलहाल लोजपा में टूट के बाद चिराग को अपना कोई दिख नहीं रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि लोजपा का राजनीतिक भविष्य क्या होता है?

DILIP KUMAR HOSPITALIZED

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सांस फूलने की शिकायत के बाद दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार को मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती ( Dilip Kumar hospitalized ) करवाया गया है। 98 वर्षीय अभिनेता वरिष्ट डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इससे पहले भी दिलीप कुमार को मई में रूटीनी चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।  मई में चेकअप के बाद अभिनेता को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। ।

दिलीप कुमार के ऑफिसियल ट्विटर से किया गया ट्विट

दिलीप कुमार के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से प्रशंसकों को अभिनेता के स्वास्थ्य के बारे में अपडेट किया गया है। ट्विट में लिखा है, “दिलीप साहब को नियमित जांच के लिए गैर-कोविड पीडी हिंदुजा अस्पताल में भर्ती ( Dilip Kumar hospitalized ) कराया गया है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई है। डॉ नितिन गोखले के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम उनका इलाज कर रही है। कृपया साहब को अपने पास रखें। प्रार्थना करें और कृपया सुरक्षित रहें । 

दिलीप कुमार ने नहीं मनाया था जन्मदिन

वैसे तो अभिनेता दिलीप कुमार 11 दिसम्बर , 2020 को हीं  98 साल के हो गए हैं। अब जब दिलीप कुमार अस्पताल में भर्ती( Dilip Kumar hospitalized )  हैं तो उनके 98वें जन्मदिन से जुड़ा यह तथ्य भी जानिये। दिलीप कुमार अपना 98वाँ जन्मदिन नहीं मना सके थे। 98वाँ जन्मदिन नहीं मनाने की वजह उनके दो सगे भाईयों का खोना था। दिलीप कुमार के 98वें जन्मदिन पर पत्नी ने कहा था

“इस साल हमारे पास एक आपदा थी। दिलीप साहब हार गए। उसके दो भाई। वह ठीक नहीं रहता है, न ही मैं। यह हमारे लिए कठिन समय है, इसलिए बड़े उत्सव का कोई सवाल ही नहीं है। हम जीवन और स्वास्थ्य के उपहार के लिए बस भगवान को धन्यवाद देंगे। “

बताते चलें कि दिलीप कुमार और सायरा बानो  कोरोना वायरस महामारी के कारण मार्च  2020 से होम आइसोलेशन में थे।

दिलीप कुमार का असली नाम मुहम्मद यूसुफ खान है

दिलीप कुमार आयशा बेगम और लाला गुलाम सरवर खान के  12 बच्चों में से एक हैं।  11 दिसंबर, 1922 को मुहम्मद यूसुफ खान के रूप में जन्मे दिलीप कुमार ने 1944 की फिल्म ज्वार भाटा से अपने अभिनय की शुरुआत की थी। 1947 की फिल्म “जुगनू” ने दिलीप कुमार को एक अभिनेता  के रूप में सुर्खियों में ला दिया था। पाकिस्तान में अभिनेता के पुश्तैनी घर को वहां की सरकार एक संग्रहालय में तब्दील कर रही है। दिलीप कुमार कई बॉलीवुड फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें जोगन, बाबुल, आजाद, तराना, दीदार, आन, कर्मा, फुटपाथ, दाग, देवदास और मुगल-ए-आजम शामिल हैं। दिलीप कुमार ने 1998 ई में आई फिल्म “किला”  में आखरी बार नजर आये थे। 

MODI NITISH IMAGE

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जब से ट्विटर आया है नेताओं के लिए मन की बात कहना आसान हो गया है और लड़कर मीडिया में खबर बनवाना भी। बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग पुरानी है और उठाने वाले लोग भी राजनीति में पुराने। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को एक बार फिर से हवा दी जा रही है। ध्यान रहे, बस हवा है। कुछ और बात कहने के लिए कुछ और कहने का तरीका पुराना है। आने वाले कुछ महीनों में बिहार की सियासत में नूराकुश्ती का खेल तेज होने वाला है। संभव है श्री बाबू के लम्बे कार्यकाल के रिकार्ड को ब्रेक करते हीं नीतीश बाबू ब्रेक लें। ब्रेक के बाद क्या होगा इसकी तैयारी  में मांझी, साहनी सब जुटे हैं। लिहाजा पाण्डेय जी की बयानबाजी सत्ता का सत्ता से लड़ाई का ,खत्म नहीं हुआ था कि मांझी -कुशवाहा मिलकर अब फिर से सत्ता बनाम सत्ता की लड़ाई शुरू करने की तैयारी मे जुट चुके हैं।

बिहार बने विशेष राज्य (Special status to Bihar), बनायेगा कौन ? 

बिहार को विशेष राज्य की मांग कॉग्रेस के केंद्र वाली सरकार के खिलाफ नीतीश बाबू का मुहिम था। कॉग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हो गयी है। 2014 में नीतीश बाबू मोदी के खिलाफ थे और 2019 में साथ। सियासी उलटफेर के ध्रुव लालू यादव भी अब बिहार की सियासत  में जमानत लेकर आ चुके है । लिहाजा मांझी,साहनी सब नई संभावना तलाशने में जुटे हैं । वरना कोई क्यों लगातार नई- नई मांग अपनी हीं सरकार से सार्वजनिक रूप से रखेगा ?  अब नई मांग फिर सत्ता की ओर से सत्ता से ही रखा गया है । मांग बिहार को विशेष राज्य  के दर्जे की है। कुशवाहा 5 जून को  संध्य़ा 2:18  मिनट पर नीतीश बाबू की तारीफ करते प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग से मांग की कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए । मांझी थोड़ा पिछड़ गये । कुशवाहा की ट्विट पढ़े होंगे  लेकिन सोंच में पड़े रहे कि क्या कहा जाये? 3 घंटे बाद ट्विट आया लेकिन ट्विट पढ़ने पर साफ- साफ नहीं कह सकते कि नीतीश बाबू की तारीफ कर रहे या विरोध ।  मांझी लिखते हैं

कम संसाधनों के बावजूद नीतीश जी ने बिहार की बदतर क़ानून व्यवस्था और बेहाल शिक्षा महकमे को दुरुस्त करने में अपनी पुरी ताक़त लगा दी है”

मांझी यहीं नहीं रूके , आगे  कहा

डबल इंजन की सरकार में विशेष दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा।

तारीफ और सस्पेंस से भरे कुशवाहा और मांझी के ट्विट पर हम सब को सोंचना तो चाहिए ही। इतने साल सत्ता में रहने के बाद भी जो विशेष राज्य के दर्जे की मांग नहीं मनवा सके तो फिर से ध्यान आकर्षण प्रस्ताव क्यों ला रहे ? सवाल अब भी जारी है कि बिहार बने विशेष राज्य ( Special status to Bihar) लेकिन बनायेगा कौन ?

5G impact on environment

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हर चर्चा के शुरू होने से पहले की एक पटकथा होती है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने जब उफान पकड़ा तो रोज हजारों लोग मरने लगें । अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा तो कहानी शुरू हुयी कि कहीं देश में शुरू हो रहा 5जी सेवा  ( 5G Service )  तो नहीं है हाहाकार की वजह? सवाल उठाया जाने लगा, अलग- अलग तर्क दिये जाने लगें कि 4 जी के कारण छोटे छोटे जीव मारे गये। कहीं 5जी सेवा (5G Service)  इंसान को तो नहीं निगलेगा? चर्चा सोशल मीडिया से शुरू हुआ तो अभिनेत्री से पर्यावरणविद बनीं जूही चावला भी मैदान में उतर गयीं। कोर्ट में 5जी नेटवर्क को चुनौती तक दे डालीं । हालांकि कोर्ट ने पेटिशन खारिज करते हुए 20 लाख का जुर्माना तक लगा दिया। साथ हीं कोर्ट ने टिप्पणी की कि ये सिर्फ एक पब्लिसिटी स्‍टंट था जिसमें मीडिया का ध्‍यान अपनी तरफ खींचने की कोशिश की गई थी । खैर केस का परिणाम जो भी रहा हो लेकिन बड़ा सवाल है कि क्‍या वाकई पर्यावरण और जानवरों के लिए खतरनाक है 5जी सर्विस ? ( Is 5G service really dangerous for the environment and animals? )

क्या होंगे 5 जी के फायदे?

क्‍या वाकई पर्यावरण और जानवरों के लिए खतरनाक है 5जी सर्विस ? ( Is 5G service really dangerous for the environment and animals? ) इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने से पहले आइए हम जानते हैं क्या होंगे 5 जी सेवा ( 5G service ) के फायदे ?  दरअसल दुनिया के कई देश इस समय 5जी सर्विस ( 5G service )  को लॉन्‍च करने की तैयारी में जूटे हैं.। कई रिसर्चर की तरफ से इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि 5जी सेवा ( 5G service ) इंसानों और पर्यावरण के लिए खतरा हो सकता है। यही नहीं कई वैज्ञानिकों और डॉक्‍टरों की तरफ से अपील की गई है कि 5जी को रोका जाना चाहिए। हालांकि तकनीकी क्रांति के इस युग में 5जी की जरूरत इस बात से समझा जा सकता है कि 5जी ,  4जी की तुलना में 1000 गुना ज्‍यादा तेज इंटरनेट एक्सेस देने जा रहा  है।  कहा तो यह भी जा रहा कि 5जी के आने के बाद आप अपने फोन में 100 जीबी प्रति सेकेंड की रफ्तार से 4 हजार वीडियोज देख सकेंगे।

कई मनगढंत कहानी चलन में है।

क्‍या वाकई पर्यावरण और जानवरों के लिए खतरनाक है 5जी सर्विस ? ( Is 5G service really dangerous for the environment and animals? ) इसे समझने की प्रक्रिया में हमें यह भी जानना चाहिए कि 5जी को लेकर क्या मनगढ़ंत कहानिया बनाई जा रही है और क्या है उसकी मूल वजह ? वैसे तो 5जी अभी लॉन्च नहीं की जा सकी है  लेकिन जब से 5जी की लॉन्चिंग का ऐलान किया गया है तब से ही लोग कई तरह की कहानियाँ बना रहे हैं। यही नहीं लोगों का रवैया साफ- साफ 5जी के प्रति उदासीनता भरी है। 5जी सर्विस के साथ सुरक्षा को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट में तो यहाँ तक कहा गया था कि 5जी की वजह से नीदरलैंड्स में सैंकड़ों चिड़‍िया मर गई थीं। हालांकि बाद में ये खबर सिर्फ एक अफवाह साबित हुई। इस तरह की कई और फेक स्‍टोरीज मीडिया में आ चुकी हैं। दरअसल 5जी को लेकर जो चिंता जताई जा रही है वो इसकी अत्‍यधिक हाई फ्रिक्‍वेंसी की वजह से है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी फ्रिक्‍वेंसी 30 गिगाहर्ट्ज से लेकर 300 गीगाहर्ट्ज तक होने वाली है।

 एंटीना का जाल बुन रहा 5जी के लिए कहानियों का जाल

5जी सेवा पूर्ण रूप से वायरलेस होने वाली है । ऐसा करने के लिए बताया जा रहा है कि 5जी सर्विस में हर 100 से 200 मीटर की दूरी पर एक एंटीना होगा।  ऐसे में ऐंटीना का जाल 5जी सेवा को उपलब्ध करवा रहा होगा। हालांकि इस सर्विस का जानवरों और पर्यावरण पर कोई प्रभाव होगा इसे लेकर दो तरह के मत हम सबों के सामने  हैं। इन दोनों मतो को जान कर हीं हम यह निर्णय ले पायेंगे कि क्‍या वाकई पर्यावरण और जानवरों के लिए खतरनाक है 5जी सर्विस ? ( Is 5G service really dangerous for the environment and animals? )

पहली मत वायरलेस कंपनियों और अमेरिकी संस्‍था सीडीसी की है। सीडीसी  के  तरफ से जनता को भरोसा दिलाया गया है कि 5जी नेटवर्क पूरी तरह से सुरक्षित है।

दूसरी मत  वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन के तहत आने वाली इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने की है।  अमेरिका की नेशनल टॉक्‍सीकोलॉजी प्रोग्राम (NTP) की तरफ से हुई स्‍टडी में इस बात के सुबूत मिले हैं कि सेलफोन की ज्‍यादा फ्रिक्‍वेंसी कैंसर के खतरे को बढ़ाती है। हालांकि अभी कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले हैं कि 5जी की वजह से जानवरों को कोई नुकसान पहुंचता है भी है या नहीं ?

अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं !

5जी सेवा अभी शुरू नहीं हुयी । लॉन्च तक 5जी नहीं किया जा सका है बावजूद इसके साल 2019 और 2020 में कुछ स्‍टडीज हुईं । हालांकि स्टडीज में ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है कि  इस सेवा का जानवरों पर कोई असर पड़ेगा। जब तक कोई ठोस सुबूत नहीं मिल जाते हैं तब तक 5जी पर कुछ भी कहना सही नहीं होगा। यह सेवा जानवरों और पर्यावरण के लिए खतरा है, इसे जानने के लिए थोड़ा इंतजार करना हीं होगा। हम कह सकते हैं कि क्‍या वाकई पर्यावरण और जानवरों के लिए खतरनाक है 5जी सर्विस? ( Is 5G service really dangerous for the environment and animals? )  इसका हम सबके पास अब भी कोई ठोस जवाब नहीं है।

ugliest language of india

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Ugliest Language in India Controversy : भारत भाषायी विविधता से भरा है। हर क्षेत्र की अपनी भाषा है और उनकी अपनी लिपि भी। जरा सोंचिये, आपके द्वारा बोले जा रहे भाषा को कोई बदसूरत और घटिया भाषा कहे तो आपको कैसा महसूस होगा ? सोशल मीडिया पर भारत के सबसे बदसूरत भाषा कौन ? यह विवाद छीड़ा हुआ है। विवाद इसलिए और ज्यादा है क्योंकि यह    कोई और नहीं बल्कि दुनिया के नामी सर्च इंजन गूगल बता रहा है। गूगल ने भारत के 4 करोड़ लोगों की भाषा कन्नड़ (Kannada )  को अपने सर्च लिस्ट में भारत की सबसे बदसूरत भाषा बताने लगा । भारत की सबसे बदसूरत भाषा का जवाब कन्नड़ (Kannada ) है जो पहली बार debtconsolidationsquad.com नामक वेबसाईट पर देखा गया था। वेबसाइट खोले जाने पर अभी 429 error दिखाती है। इससे पहले वेबसाईट ने भारत में सबसे आसान भाषा और भारत में सबसे सुंदर भाषा सहित भाषाओं से संबंधित 15 प्रश्नों और उत्तरों की सूची प्रदर्शित करती थी। जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ है। 

लोग कर रहे गूगल से माफी मांगने की मांग

4 करोड़ लोगों की भाषा को भारत के सबसे बदसूरत भाषा (Ugliest Language in India) बताये जाने पर लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि गूगल को अपने इस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए। बैंगलौर स्थित आईटी कंपनी थिंकनेक्स्ट ने गूगल से सर्च रिजल्ट को हटाने के लिए change.org पर एक याचिका शुरू की है। अब तक इस लेख को लिखे जाने तक 2,271 लोगों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं । 

World Environment Day

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World Environment Day 2021 : विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। पर्यावरण के प्रति हम सब के कर्तव्यों को याद करने के लिए हम यह दिन मनाते हैं। हम अपने आस पास जितनी भी चीजों का उपयोग कर रहे होते हैं वह सब हमारे पर्यावरण का हिस्सा  है। जब हम हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day ) मना रहे होते हैं तो हमारा मकसद अपने आस- पास के पर्यावरण को शुद्ध करने वाले पेड़-पौधे लगाने, पेड़ों को संरक्षित करने, हरे पेड़ न काटने, नदियों को साफ़ रखने और प्रकृति से खिलवाड़ न करने जैसी चीजों के लिए जागरुक करना होता है।

कैसे तय हुआ पर्यावरण दिवस ( World Environment Day )

पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए मनाये जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस का मनाने का सिल- सिला कैसे शुरू हुआ यह एक आम सवाल है जो लोगों के जेहन में आता है।वैसे तो साल 1972 में हीं संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व स्तर पर पर्यावरण दिवस मनाया गया था । लेकिन विश्व स्तर पर पर्यावरण दिवस मनाने की शुरूआत 5 जून 1974 को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से शुरू हुई। स्टॉकहोम में 5 जून-16 जून 1974 तक पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था । इस सम्मेलन में कुल 119 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन का स्लोगन था “केवल एक पृथ्वी” (“Only one Earth”)। सम्मेलन में सम्मिलित 119 देशों के प्रतिनिधियों की सहमती से  संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का गठन किया गया। साथ ही प्रति वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day ) मनाने का निर्णय लिया गया ।

कौन है इस बार पर्यावरण दिवस का मेजबान, क्या है थीम ?

साल 1974 से अब तक 5 जून ( 5 June) को मनाये जाने वाला  विश्व पर्यावरण दिवस  के मेजबान और पर्यावरण दिवस का अगला थीम तय कर दिया जाता है। साल 2021 के विश्‍व पर्यावरण दिवस  ( World Environment Day ) का थीम है “पारिस्थितिकी तंत्र बहाली” ( Ecosystem Restoration ) । इसके तहत क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने में सहयोग देना, नाजुक दौर से गुजर रहे पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण जैसी बातें शामिल हैं। बताते चलें कि पारिस्थितिकी तंत्र को कई तरह से बहाल किया जा सकता है। पेड़ लगाना पर्यावरण की देखभाल के सबसे आसान और सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। इस साल मनाये जा रहे विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान कर रहा है। बताते चलें कि 2020 के पर्यावरण दिवस का थीम “जैव विविधता” (Biodiversity) था। इसके अलावा वर्ष 2019 में पर्यावरण दिवस का थीम “वायु प्रदूषण” (“Air Pollution”) और  वर्ष 2018 में “बीट प्लास्टिक पोल्यूशन” (“Beat Plastic Pollution”)  के थीम पर पर्यावरण दिवस मनाया जा चुका है।

Red yellow orange alert

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कुछ दिन पहले हीं तौकते चक्रवाती तूफान के प्रभाव से भारत का दक्षिणी हिस्सा उबरा है। अब पूर्वी भारत के बंगाल ,उड़ीसा, अंडमान निकोबार द्वीप समूह समेत बिहार और झारखण्ड जैसे राज्य यास तूफान के प्रभाव (Yash cyclone Impact ) में हैं। जब कभी भी तूफान या चक्रवात आतें हैं तो भारतीय मौसम विभाग की ओर से अलर्ट जारी किया जाता है। अलर्ट में अक्सर रेड अलर्ट( Red alert), यलो अलर्ट (Yellow Alert ) और ऑरेंज अलर्ट (Orange alert) जैसे शब्दावली का प्रयोग भारतीय मौसम विभाग ( IMD) की ओर से किया जाता है। चक्रवात (cyclone) य़ा आमतौर पर भी मौसम खराब होने के समय में प्रयोग किये जाने वाले इन शब्दावली का क्या है मतलब आइए एक-एक करके समझते हैं।

चक्रवात में  रेड अलर्ट ( Red alert during cyclone )

रेड अलर्ट अक्सर चक्रवात के समय हीं जारी किया जाता है।  भारत फिलहाल यस चक्रवात से  प्रभावित ( Yash cyclone Impact ) हो रहा है।  देश के ज्यादातर तटीय इलाके में जब चक्रवात आने की संभावना रहती है तब चक्रवात के कारण हवा की रफ्तार स्थापित चीजों के सहन करने की क्षमता से अधिक होती है। तब जान- माल की बड़े पैमाने पर नुकसान का खतर रहता है। ऐसी स्थिति में भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ओर से रेड अलर्ट जारी किया जाता है। रेड अलर्ट जारी होने का मतलब यह समझा जाना चाहिए कि इलाका फिलहाल रहने योग्य नहीं है ।यहां जान का खतरा हो सकता है। रेड अलर्ट के इलाके में एनडीआरएफ (NDRF) , एसडीआरएफ ( SDRF ) और सेना के जवान लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए तत्पर रहते हैं । इलाके के सार्वजनिक परिवहन , स्कूल सेवा , तथा अन्य रूटीनी (सामान्य)  कार्य तूफान से उत्पन्न स्थिति सामान्य होने तक बंद कर दिये जाते हैं।

यलो अलर्ट ( Yellow alert ) मतलब सचेत रहना है।

यास चक्रवात के प्रभाव ( Yash cyclone Impact )  के कारण कई इलाके में यलो अलर्ट भी जारी किया गया है।  यलो अलर्ट सिर्फ चक्रवात के समय हीं नहीं बल्कि आपके इलाके के मौसम खराब होने, भारी बारिश होने की संभावना पर , बिजली गिरने की संभावना आदि के समय भी यह अलर्ट जारी किया जा सकता है। यलो अलर्ट का मतलब है कि आप अपने रूटीनी (सामान्य)  काम पर लगे रहें लेकिन सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग की सूचनाओं से खुद को अपडेट रखें। चक्रवात के समय यलो अलर्ट जारी होने की संभावना का मतलब है कि आपका इलाका रेड अलर्ट वाले इलाके से सटा हुआ है । आपके इलाके में हवा की तेज रफ्तार रहेगी और भारी बारिश     होने की संभावना है।

ऑरेंज अलर्ट ( Orange alert ) का मतलब “तैयार रहना है”

मौजूदा समय में जब तौकते चक्रवाती तूफान से उबरने के बाद भारत का पूर्वी भाग यास चक्रवात के प्रभाव ( Yash cyclone Impact) में है तब कुछ इलाके में  ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। रेड अलर्ट की तरह हीं ऑरेंज अलर्ट है । ऑरेंज अलर्ट जारी होने का सामान्य मतलब है कि खराब मौसम के प्रभाव के लिए आपको तैयार रहना है। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ चक्रवात के समय ही जारी की जाती है। ऑरेंज अलर्ट में मौसम का मतलब ठंढ़ा ,गर्मी और वर्षा किसी भी समय के खराब मौसम से हो सकता है। मौसम विभाग खराब मौसम में यह अलर्ट जारी कर सकता है। खराब मौसम का असर खास इलाके के जनजीवन पर पड़ता है। ऑरेंज अलर्ट के समय प्रशासन कुछ समय के लिए यात्रा , स्कूल और दूसरी जरूरी सेवाओं का ख्याल रखती है जो प्रशासनिक स्वविवेक और इलाके की स्थिति पर निर्भर करता है। प्रशासन चाहे तो स्कूल आदि भी बंद  कुछ समय के लिए करवा सकते हैं।

क्या पूरी दुनिया रेड, ऑरेंज,  यलो अलर्ट जारी करता है ?  

आम तौर पर चक्रवातों के प्रभाव या आम मौसमी प्रभाव को इंगित करने के लिए भारत समेत दुनिया के लगभग सभी देश इसी प्रणाली का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन अपवाद के रूप में कुछ ऐसे भी देश मौजूद हैं जो खराब मौसम से संबंधित अलर्ट जारी करने के लिए अलग संकेतों का प्रयोग करते हैं। स्वीडन ऐसा हीं एक देश है। स्वीडन अपने नागरिकों को सतर्क करने के लिए जिन संकेतों का प्रयोग करता है उसमें क्लास-1, क्लास-2, क्लास-3 अलर्ट शामिल है। क्लास -1 से स्वीडन के मौसम विभाग का तात्पर्य सतर्कता है। क्लास-2 का मतलब मौसम खराब है और नागरिकों को तैयार रहनी है। क्लास-3 का मतलब स्थिति अतिगंभीर है तथा नागरिकों को सुरक्षित रहनी है।