corona psychological effect : कोरोना के कारण कटघरे में खड़ा हुए भगवान ?

जनबोल न्यूज

कोरोना  कहाँ से फैला जवाब सबके पास है।

कोरोना से किस देश में कितने लोग मरे इसका भी जवाब सबके पास है।

कोरोना के कारन कितने दिनों का लॉक डाउन है इसका भी जवाब समझता हूँ सबके पास है ।

लेकिन क्या आपको लगता है कोरोना के कारण पहली बार भगवान बिमार होगए हैं।

क्या आप सोंच सकते हैं भगवान को कोरोना के कारण जन आदलतों में मुजरिम साबित किया जा सकता है।

यदि आपका जवाब नहीं है तो इन सवालों पर गौर फरमाया जाये ?

हम किसी भी धर्म के धर्मालंबी हों दान कहाँ देते हैं अस्पताल में या  भगवान के घर ?

समझता हूँ आपका जवाब जरूर भगवान के घर में होगा यानि मंदीर मस्जिद गिरजाघर , गुरूद्वारा होगा ।

क्या कोरोना का ईलायज भगवान के घर में है? संभवत: आपका जवाब नहीं होना चाहिए।

लेकिन यदि आप कट्टर आस्तिक हैं और जनता कर्फ्यू के दिन से हीं रोज शाम पांच बजे थाली पीटना शुरू कर दिये हैं तो भी

क्या इतनी जानों को एक साथ खत्म करने के एवज में भगवान पर मुकदमा नहीं चलना चाहिए ?

अपने अपने तरिके से लोग उठा रहे हैं सोशल मीडिया पर भगवान के खिलाफ आवाज ?  

खगड़िया के रहने वाली गायत्री पंड़ीत  अपने फेसबूक अकाउंट पर लिखती हैं

वहीं  Harikeshwar Ram  लिख रहे –

किसी भी विपदा से निपटने में ढोंग, पाखंड या किसी धार्मिक मसीहा का कोई रोल नहीं ।

यह पूरी तरह से लोगो की जानकारी , जागरूकता और विपदा से निपटने का प्रतिबद्ध संकल्प का ही रोल ।

यह  मात्र दो  उदाहरण है जो हम अपने मित्रता सूचि से निकाल कर आपसे साझा कर रहे हैं। ऐसे लाखो लोग हैं जो  कोरोना के बहाने भगवान को भी कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

सवाल लाजमी भी है आखिर क्यों  भगवान के आगे पसारे गए हाथ काम नहीं आरहे हैं । अंतत: विज्ञान के सहारे हीं हम जीना पसंद कर रहे हैं?

भगवान और भगवान  और भगवान का बिचौलिया  कटघरे में तो है ।
 

Garbage Collection Song :बिहार – तीन दिनों से नहीं बज रहा , गाड़ी वाला आया घर से कचड़ा निकाल

Janbol News

राजधानी पटना समेत बिहार भर में एक गाना रोज सुबह सुना जाता  था । गाड़ीवाला आया घर से कचड़ा निकाल …

कचड़ा क्लेक्शन की यह गाड़ी लोगों के जुबान पर न केवल गाना  चढ़ाने लगा था बल्कि “पटना” स्मार्ट सिटी का सपना भी दिखने लगा था ।

लेकिन पिछले तीन दिनों से बिहार भर में यह गाना नहीं सुना जा रहा है ।

दरअसल नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए को सत्ता में आने के बाद  2007 में सफाई मजदूरों की एक कैटेग्री बनायी गयी थीः

“दैनिक सफाई मजदूर” – काम वही लेकिन जीवन की सुरक्षा की गैरेंटी नहीं  ।

अब हाईकोर्ट के जजमेंट के बाद दैनिक सफाई मजदूर जो तिस दिन काम करके 24 दिन का वेतन उठाते थे की नौकरी छीन ली गयी है।

नौकरी सिर्फ  राजधानी पटना में हीं नहीं बिहार के सभी  नगर निगम , नगर परिषद और नगर पंचायत के तकरीब 50 हजार दैनिक मजदूर 31 दिसम्बर के बाद बेरोजगार हैं।

यह है सफाई मजदूरों की प्रमुख मांग-

दरअसल दैनिक सफाई मजदूरों की नियुक्ति और भुगतान अब तक वार्ड पार्षद किया करते थे।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब यह काम कोई N G O या निजी कंपनी करेगी जिसे सरकारी भाषा में आउटसोर्सिंग कही जा रही है ।

अबतक कई बार सफाई मजदूर जिनकी सेवा 10 साल होगीय थी स्थाईकरण के लिए आवाज उठा चुके हैं।

अब सफाई मजदूर मांग कर रहे हैं कि जितने लोग 40 दिनों तक काम किये हैं उन सब को स्थाई की जाए।

दर असल सरकार और मजदूरों के बीच ठन सी गयी है और बिहार में दैनिक मजदूर के तौड़ पर काम करने वाला न गाड़ी वाला आरहा है न हीं गाना बज रहा है।

 

Patna university election result : भूमिहार ब्राहमण का सफाया नही Youtubia मीडिया का जातिवादी आया है सामने।

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का परिणाम सामने है। कैंडीडेटों की जाति खोज ली गयी है ।

कितने साल पहले कौन बना था अध्यक्ष सबको पता भी है लेकिन मेन स्ट्रीम मीडिया शायद जात पात से उपर उठने लगी है।

मेन स्ट्रीम मीडिया मे कहीं कैंडिडेटों के जाति की चर्चा नहीं है सिर्फ नाम की चर्चा है। पहली बार Youtubia मीडिया ने नग्न जातिवादी सोंच का परिचय दिया है ।

होसकता है VIEWS बढ़ाना मकसद हो या जातिवादी alert जारी करना भी।

दरअसल डेढ़ मीलियन दर्शक बनाये एक घोर जातिवादी चैनल के माध्यम से छात्र संघ के पदाधिकारियों के जाति की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

शिक्षण संस्थानो में जातिवाद घुसाने की इतनी नंगी कोशिश शायद मीडिया के माध्यम से  पहले कभी नही कि गयी थी।

अजीब वीडंबना है पेट पालने और चैनल चलाने के लिए जिस व्यक्ति के थाली का रोजाना इस्तेमाल किया जा रहा था  वही  थाली में जातिवादी जहर भाी घोला जा रहा है।

विश्वविद्यालय में छात्र अध्यक्ष बनते हैं ब्राहमण , भूमिहार या किसी और जाति संघ के अध्यक्ष नहीं ।

हममें से कोई व्यक्ति जो थोड़ा भी जानकारी रखता हो भाषा का , इतना तो जानता हीं होगा विद्यार्थी पढ़ने वाले को कहते हैं।

पढ़ने वाला हिन्दु हो सकता है , मुस्लिम हो सकता है ब्रहमण हो सकता है , भूमिहार , यादव कोईरी कुर्मी कुछ भी हो सकता है लेकिन सबको छात्र हीं कहा जाता  है।

इसलिए छात्र नेता हीं कहा जाता है  जीते विद्यार्थी को , और जिस कार्यालय में ये छात्र बैठते हैं उन्हे छात्रसंघ कार्यालय नाम दिया गया है।

पूरी प्रक्रिया मे कही भी उनकी जाति नहीं जुड़ता लेकिन ज्ञानि भईया को छात्र नेता में जाति भी दिख रहा है।

मामला साफ है ज्ञानि भईया की जाति पता कर ली जाये छात्र राजनीति के अंदर जातिवाद घुसाने की वजह साफ हो जायेगी।

पटना विश्वविद्यालय के छात्रों से अपील ..

जनबोल न्यूज छात्र राजनीति और छात्र जिंदगी से अभी- अभी निकले विद्यार्थियों का initiative है इसलिए हम समझते हैं हमारा मुद्दा हमारा जाति नहीं हैं।

हमारा मुद्दा एक विश्वविद्यालय मे एक तरह की फिस लाना है । एक कोर्स एक हीं कॉलेज मे Vocational regular दोनों मोड में कैसे  यह ठीक करना है।

कैंपस की सुरक्षा हो यह हमारा मुद्दा है । विश्वविद्यालय को पूर्णत: आवासिय कैसे बनाया जाये  यह हमारा मुद्दा है।

वाणिज्य महाविद्यालय को अपना कैंपस कैसे मिले यह हमारा मुद्दा 1968 से है।

छात्रसंघ के पदाधिकारी  किस जाति बीरादरी से आता है यह जाने बीना आपको हकों के लिए लड़ना है ।

जब विश्वविद्यालय के गरिमा बचेगी तो ज्ञानि बाबा की गरिमा  कुलपति से बदतमिजि भरा सवाल  नहीं करेगी।

फिर यहाँ सब जाति के बच्चे आयेंगे पढ़ेंगे और जो कामके लायक होगा उनको बीना जाति जाने हम विद्यार्थी समुदाय छात्रसंघ पदाधिकारी बनायेंगे भी।

खुसट बुढ़ ज्ञानि बाबा का अपना जातिवादी दौर था इसलिए Youtubia जातिवाद फैला रहे हैं।

सावधान रहिये  विश्वविद्यालय जातिवाद मुक्त हो इसकी हर संभव कोशिश करिये।