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U P election 2022 : उत्तर प्रदेश में होने वाले 2022 के चुनाव में अभी तकरीबन साल भर बाकी हैं। लेकिन सियासी पारा अभी से हीं चढ़ने लगा हैं। आलम यह है कि नेता, पार्टी बदलने लगे हैं तो 2019 में साथ-साथ लोकसभा चुनाव लड़ने वाली मायावती और अखिलेश की पार्टी एक दूसरे पर जुबानी जंग जारी रखे हुए हैं। जहाँ अखिलेश यादव ने सपा के निष्कासित विधायकों को पार्टी में शामिल करवाने का दावा किया तो मायावती ने ट्विट कर अखिलेश को जवाब दिया है। मायावती ने अखिलेश यादव पर अपने हमले को जारी रखते हुए एक बार फिर से ट्विट की। मायावती ने गुरुवार को भी दो ट्वीट की और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पर बड़ा आरोप लगाया है।

अखिलेश को नहीं है स्थानीय नेताओं पर भरोसा

उत्तरप्रदेश में 2022में होने जा रहे विधानसभा चुनाव ( U P election 2022 )  से पूर्व सपा द्वारा पार्टी मे शामिल करवाये जा रहे बसपा के नेताओं पर मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की हालत इतनी ज्यादा खराब हो गई है कि अब इस पार्टी के अध्यक्ष आए दिन मीडिया में बने रहने के लिए कुछ न कुछ करते ही रहते हैं। इसके लिए दूसरी पार्टी से निष्कासित व अपने क्षेत्र में प्रभावहीन हो चुके पूर्व विधायकों व छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं आदि तक को भी समाजवादी पार्टी के मुखिया को कई-कई बार खुद पार्टी में शामिल कराना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि ऐसा लगता है कि सपा मुखिया को अब अपने स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं रहा है। यह सर्वविदित है कि अन्य पाटियों के साथ-साथ खासकर सपा के ऐसे लोगों की छानबीन करके उनमें से केवल सही लोगों को बीएसपी के स्थानीय नेता आए दिन बीएसपी में शामिल कराते रहते है।

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Up Political News : हाल हीं में सम्पन्न पांच राज्यों के चुनाव के बाद अब 2022 में होने जा रहे देश के बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में विधानसभा के चुनाव की सरगर्मी धीरे- धीरे बढ़ रही है। जहाँ योगी भाजपा के दिल्ली दरबार में मत्था टेक रहे हैं तो अलग अलग पार्टी के नेता पाला भी बदल रहे हैं। कुछ दिन पहले हीं भाजपा ने कॉग्रेस नेता जितिन प्रसाद को न केवल पार्टी में शामिल करवाया था बल्कि बाद में योगी मंत्रीमंडल का हिस्सा भी बनवाया। इसके कुछ समय  बाद हीं समाजवादी पार्टी के  मुखिया अखिलेश  यादव से बहुजन समाज पार्टी के निष्कासित विधायक ने मुलाकात की। यह भी दावा किया गया है कि ये सभी विधायक जल्द हीं सपा में शामिल होने जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के इस दावे पर अब बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती की भी प्रतिक्रिया सामने आयी है।

मायावती का अखिलेश पर ट्विटर वॉर

उत्तरप्रदेश की राजनीतिक अखाड़े की खबर ( Up Political News ) लोकसभा में साथ चुनाव लड़ी सपा और बसपा के बीच के खटपट को हवा दे रही है। दरअसल बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने निष्कासित विधायकों को सपा प्रमुख द्वारा अपने दल में शामिल करवाने की कोशिश को सपा का छलावा बतायी है। यहीं नहीं मायावती की मानें तो यह सपा का घृणित राजनीति है। उन्होने अपने ट्वीटर हैंडल से एक के बाद एक पॉच ट्विट करते हुए लिखती हैं.।

घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं घोर छलावा।

जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बीएसपी से निलम्बित किया जा चुका है।

सपा अगर इन निलम्बित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। क्योंकि इनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं।

जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं। इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बन्द किया व खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय।

वैसे बीएसपी के निलम्बित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है।यूपी में बीएसपी जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है जो जारी रहेगा

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Chitrakut Jail Case  रिहाई मंच ने चित्रकूट जिला जेल में मेराजुद्दीन, मुकीम और अंशू दीक्षित की हत्या पर सवाल किया कि आखिर जेल में कैसे पहुंचा हथियार, वह भी कोराना काल में जब मुलाकात तक बंद है और कैदी अलग-अलग जगहों पर बंद थे। नाइन एमएम की पिस्टल की बात प्रमुखता से आई है तो वहीं जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि कैंदियों में बहस रुकवाने पहुंचे जेल स्टाफ से अंशु ने सर्विस रिवाॅल्वर छीन ली थी। यह भी कहा जा रहा है कि अंशु ने मेराजुद्दीन को मारा फिर मुकीम को।Continue Reading

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लखनऊ 29 अप्रैल 2021। रिहाई मंच ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को झूठ नहीं बोलना चाहिए। सच्चाई तो सूबे की सड़कों पर चिंघाड़ मार रही है। आखिर जब आक्सीजन, बेड, दवा की कमी नहीं है तो क्या जनता सरकार को बदनाम करने के लिए अपनी सांसे तोड़ रही है। मुख्यमंत्री का यह कहना कि यूपी में ना के बराबर कोविड केस, सच्चाई से परे है। मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं, गलत बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें जिम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि राम भक्त हनुमान जीवन रक्षक संजीवनी के लिए पूरा पहाड़ ले आते हैं। लेकिन यहां खुद को राम भक्त कहने वालों और राम के नाम पर राजनीति करने वालों की सरकार में लोग आक्सीजन की कमी से तिल-तिल कर मर रहे हैं। आज देश के न्यायालय भी चुनाव आयोग से लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल कर रहे हैं तो योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वह सभी से सामंजस्य कर इस आपदा की घड़ी में जीवन रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करें। सवाल है कि अगर केन्द्र ने कहा था कि आक्सीजन प्लांट लगाए जाएं तो क्यों नहीं लगाए गए। कोरोनो के नाम पर यह जनसंहार है, मानवता की हत्या है। लोग घंटो-घंटों लाइनों में खड़े होकर आक्सीजन लेने को मजबूर हैं। फिर भी बहुत मुश्किल से कुछ को ही मिल पाती है। सरकार की एजेंसियां पूरी तरह से विफल हैं जो इस विकराल स्थिति से सरकार को रुबरु नहीं करा रहीं। उल्टे लोगों का मास्क के नाम पर चालान किया जा रहा है। जब राजधानी इतनी बेहाल है तो गांव की तस्वीर क्या होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। लोग पैरासिटामाल जैसी आम दवाओं के लिए भी इस मेडिकल से उस मेडिकल हाल पर ठोकरें खा रहे हैं।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने पूछा कि पंचायत चुनाव में डयूटी पर लगे 135 शिक्षक-शिक्षामित्रों की मौत का जिम्मेदार कौन होगा, योगी आदित्यनाथ खुद बताएं। जिन शिक्षकों पर आने वाली नस्लों की बेहतरी का भार था, उनके परिवार का भार कौन उठाएगा?

उन्होंने आगे कहा कि चुनावी ड्यूटी में लगे 135 लोगों की मौत से यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल नहीं कि पूरी चुनावी प्रक्रिया में शामिल कितने नागरिकों की कोरोना संक्रमण के चलते जान चली गई होगी। गांवों में शुरुआती दौर में हो रही मौतों को लोग समझ ही नहीं पा रहे थे। बहुत बाद में गांवों के लोग कोरोना को जान-समझ पाए कि सांस की दिक्कत से होने वाली मौतों को रोकने के लिए आक्सीजन की जरुरत है। और फिर आक्सीजन के लिए अफरा-तफरी मच गई। लखनऊ में कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों और श्मशान-कब्रिस्तान पहुंचीं लाशों के आंकड़ों में भिन्नता मिली। अगर पूरे प्रदेश से दोनों मामलों के आंकड़े जमा किये जाएं तो पुष्टि हो जायेगी कि सरकार कोरोना से होनेवाली मौतों की वास्तविक संख्या छुपा रही है।

रिहाई मंच महासचिव ने कहा कि जांच के आभाव में बहुत सी मौतों को कोरोना संक्रमण की मौतों में नहीं जोड़ा जा रहा। तमाम लोग इस डर से कि कहीं उन्हें सामाजिक कटाव न झेलनी पड़े, छिपाते हैं कि उनके अपनों की मौत कोरोना से हुई। गांवों से आ रही सूचनाएं बताती हैं कि इधर मौतों की संख्या में अचानक तेज बढ़त हुई है। यह पता करने को कोई कोशिश नहीं है कि इन असामान्य मौतों के पीछे कितना कोरोना का हाथ है।

सरकार कह रही है कि अस्पताल में बेड है और प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज किया जाएगा। सच्चाई यह है कि लोगों को कोई जानकारी ही नहीं है कि अगर कोई बीमार होगा तो कैसे उसको इलाज, आक्सीजन आदि मिलेगा। ऐसे में सार्वजनिक रुप से विज्ञापन के माध्यम से जिलेवार अस्पतालों में बेड की संख्या, उसमें भर्ती होने की प्रक्रिया आदि को विज्ञापित किया जाए। जिससे भय का माहौल कमजोर हो और लोग अपनों की उचित चिकित्सा करा पाएं। यह भी देखा जा रहा है कि लोग अन्य बीमारियों के इलाज न मिलने के चलते भी परेशान हैं। ऐसे में तत्काल सभी ओपीडी व्यवस्थाएं शुरु की जाएं और एंबुलेंस का उचित प्रबंध किया जाए।