क्वारेंटाइन सेंटरों में प्रवासी लोगों को योगाभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा रही है।

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जनबोल न्यूज

 

मानव शरीर को प्रयोगशाला का आधार मानकर ऋषियों के द्वारा प्रमाणित योग विद्या भारतवर्ष की एक अमूल्य संपत्ति है। जो वस्तुतः समक्ष मोक्ष साधनों में सर्वोत्तम तथा सर्वश्रेष्ठ साधन पद्धति है।योग विद्या को विश्वास मानवता के कल्याण हेतु सर्व भौम धर्म कहा गया है।

यथार्थ सत्य है। जो कोई नवीन खोज का परिणाम नही है।प्राचीनतम गुप्त विद्या है जिसका ज्ञान समय के साथ विभिन्न कारणों से जनसाधारण की पहुंच से दुर होता गया।वर्तमान समय में ऐसे विचार विस्तार की आवश्यकता को देखते हुए मनुष्य के अंतरण के साथ -साथ संपूर्ण विकास की संभावना को पूर्ण कर सकें।इस उद्देश्य की पूर्ति के लेकर सरकार ने भी क्वारेंटाइन सेंटर में आए सभी प्रवासी मजदूरों को योगाभ्यास करने की सलाह दी है ।

शारिरीक शिक्षक का प्रतिनियुक्ति कर क्वारेंटाइन सेंटर में भी सभी आए प्रवासी मजदूरों को योगाभ्यास करा रही है।प्रवासी मजदूरों को कोरोना वायरस के लक्षण के जाँच के लिए प्रखंड के विभिन्न जगहों पर बनायें गये सभी क्वारेंटाईन सेंटर में रखा गया है ।

जहाँ सुविधा के साथ शारिरीक शिक्षक का भी डियूटी लगाई गई है।जो अपने डियूटी के अनुसार प्रतिदिन सभी प्रवासी मजदूरों को योगाभ्यास करा रहे हैं।राम नरेश उच्च विद्यालय डिभियाँ में आए प्रवासी मजदूरों को योगाभ्यास करा रहे शारीरिक शिक्षक संजीव कुमार ने बताया कि नियमित रूप से योगाभ्यास करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में निरंतर विकास होता हैं।हमारी शरीर मन व आत्मा की शुद्धि के साथ व्यवहार और विचारों को भी यह शुद्ध रखता है।उन्होंने बताया कि क्वारेंटाइन सेंटर में योग क्रियाओं में सूक्ष्म व्यायाम, विरेचन क्रिया,ताड़ासन,त्रिकोणासन, हस्तपदासन,कपालभाति क्रिया आदि के अभ्यास के रोग प्रतिरोधक क्षमताओं का विकास करते हुए शरीर के समस्त अंग हृदय ,फेफड़ा,लीवर,किडनी आंत,रक्त नलिकाएं आदि स्वस्थ और सक्रिय करा रहे है।

 

संवाददाता  रोहतास

मो०शमशाद आलम

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