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माननीय मंत्री, कृषि विभाग, बिहार डॉ. प्रेम कुमार द्वारा आज राज्य में स्थापित डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कृषि विभाग के सचिव डॉ० एन० सरवण कुमार, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० आर०सी० श्रीवास्तव, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० अजय कुमार सिंह, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० रामेश्वर सिंह एवं कृषि विभाग के उप निदेशक (शष्य), शिक्षा श्री अनिल कुमार झा ने भाग लिया।

माननीय मंत्री ने वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण काल में दूसरे राज्यों से पलायन कर लौटे बेरोजगार लोगों के लिए कृषि, पशुपालन तथा मत्स्यपालन के क्षेत्र में अधिक-से-अधिक रोजगार उपलब्ध कराने का निदेश कुलपतियों को दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर बिहार के लोगों को लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभीषिका से जुझना पड़ता है। इसलिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों, पशुपालकों एवं मत्स्यपालकों की सहायता के लिए नये क्रॉपिंग सिस्टम तैयार किया जाये, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों, पशुपालकों एवं मत्स्यपालकों को सहुलियत हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य में 08 जिलों मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर, बाँका, मुंगेर, नवादा, गया एवं नालंदा में बोरलोग इंस्टिच्युट फॉर साऊथ एशिया (बीसा), बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्-पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पटना के तकनीकी सहयोग से में मौसम अनुकूल कृषि कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम आये हैं। इसलिए इस कार्यक्रम को राज्य के सभी जिलों में कार्यान्वित किया जायेगा।

डॉ० प्रेम ने बताया कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी द्वारा हाल ही में किसानों, पशुपालकों एवं मत्स्यपालकों के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है, जिससे बिहार के किसानों, पशुपालकों एवं मत्स्यपालकों को भी काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने इस आर्थिक पैकेज के आलोक में प्रस्ताव तैयार करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया जाये। उन्होंने कहा कि चीन से दवाओं के आयात प्रतिबंधित होने के कारण इसे अपने यहाँ ही उत्पादित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कुलपतियों को निदेश दिया कि अपने यहाँ रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर लें। उन्होंने इन विश्वविद्यालयों से पास कर रहे विद्यार्थियों का प्लेसमेंट बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित मीडिया सेन्टर के तर्ज पर डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में भी मीडिया सेन्टर विकसित करने का निदेश दिया।

डॉ० कुमार ने कहा कि बिहार में स्थित इन विश्वविद्यालयों द्वारा विगत वर्षों में आपदा, अनुसंधान, प्रचार-प्रसार आदि क्षेत्रों में सराहनीय योगदान किया गया है। इन तीनों विश्वविद्यालयों द्वारा कम समय में अच्छा कार्य करने से जनता के बीच एक अच्छा संदेश गया है। उन्होंने कृषि के औद्योगिकीकरण पर भी तेजी से कार्य करने का निदेश दिया। साथ ही, भारत सरकार द्वारा बिहार के लिए स्वीकृत अतिरिक्त कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना शीघ्र करने का निदेश दिया।

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अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन ने कर्ज मुक्ति दिवस मना कर ये मांग रखी . जो निम्न है..

1.स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी महिलाओं के सामूहिक कर्ज माफ करो.
2.एक लाख रुपये तक का निजी कर्ज चाहे वो सरकारी,माइक्रो फायनेंस संस्थानों अथवा निजी बैंकों से लिए गए हों,का लॉकडाउन के दौर का सभी किस्त माफ करो.
3.सभी छोटे कर्जों की वसूली पर 31 मार्च 2021तक रोक लगाओ.
4. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और उनके उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करो.
5. एक लाख रुपये तक के कर्ज को ब्याज मुक्त बनाओ.
6.शिक्षा लोन को ब्याज मुक्त करो.
7. सामूहिक कर्ज के नियमन के लिए राज्य स्तर पर एक ऑथोरिटी बनाओ.
8.स्वरोजगार के लिए 10लाख रुपये तक के कर्ज पर 0-4% ब्याज दर हो.
9.जिस छोटे कर्ज का ब्याज मूलधन के बराबर या उससे अधिक दे दिया गया हो उस कर्ज को समाप्त करो.

बहनो,भाइयो!
ऊपर लिखे मांगों को पिछले तीन महीने से ऐपवा लगातार उठा रहा है.रिजर्व बैंक ने निर्देश जारी किया था कि 31अगस्त तक कर्ज वसूली पर रोक रहेगी, लेकिन इस दौर में भी माइक्रो फायनांस संस्थान और प्राइवेट बैंक कर्ज के किस्त वसूल रहे हैं. हमारे आंदोलन के बाद कुछ जगहों पर ये पीछे हटे हैं. लेकिन, कई जगहों पर अभी भी महिलाओं को धमकाकर जबरन वसूली कर रहे हैं.एक जगह तो असमर्थता जताने पर कहा गया कि शरीर बेच कर जमा करो!कहीं कोई महिला अगर किस्त जमा करने की स्थिति में नहीं है तो उसके घर का सामान उठा कर ले जा रहे हैं.

लॉकडाउन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. छोटे रोजगार, काम-धंधे बंद हैं. लॉकडाउन से पहले महिलाओं ने जो भी कर्ज लिए हैं वो शौक से नहीं मजबूरी में लिए हैं. आज जबकि भोजन का इंतजाम कठिन है तब लोन की किस्त कहां से जमा करें? इसलिए हमारी मांग है कि हम महिलाओं से कर्ज वसूली बंद की जाए.
15अगस्त को हम अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति का जश्न मनाते हैं. लेकिन, हमारी सरकार आज हमें नये किस्म के महाजनों का गुलाम बनाने में लगी है.पूंजीपति अरबों रुपयों का कर्ज नहीं चुकाते तो हमारी सरकार देश के खजाने से(जिसे हम-आप टैक्स से भरते हैं)उनका कर्ज चुकाती है और महिलाएं जो कि पहले हमेशा अपना कर्ज चुकाती रही हैं, उन्हें इस संकट के समय भी सरकार मदद नहीं कर रही!

बहनो, कोरोना संक्रमण तेज रफ्तार से बढ़ रहा है.स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग भयभीत और निराश हैं लेकिन सरकार नागरिकों की चिंता के बदले अपने ही एजेंडे पर लगी हुई है. इसलिए आइए आज हम कोरोना से बचाव के गाइडलाइन व शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए अपनी मांगों के लिए आवाज उठाएं.

 

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आज भाजपा जिला कार्यालय में भाजपा जिलाध्यक्ष प्रकाश अस्थाना ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक महामारी से अभी हम जूझ ही रहे थे कि बाढ़ की विभीषिका से दोचार होना पड़ा। इस कठिन समय मेंसांसद मोतिहारी राधा मोहन सिंह ने मोतिहारी लोकसभा क्षेत्र के सभी बाढ़ प्रभावित प्रखंडों का स्वयं दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई।

सांसद मोतिहारी सह पूर्व कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के नेतृत्व में हमारे कला,संस्कृति मंत्री,बिहार सरकार प्रमोद कुमार,कल्याणपुर विधायक सचिन्द्र सिंह,पिपरा विधायक श्यामबाबू यादव,हरसिद्धि में कृष्णनंदन पासवान,गोविन्दगंज में सुनील मणि तिवारी एवं केसरिया में रामशरण यादव के साथ पार्टी कार्यकर्ता लगातार सेवा कार्य में लगे रहे।उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का मूल मंत्र सेवा ही संगठन है,और इस मंत्र को कार्यकर्ताओं ने सिद्ध भी कर दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना के विरुद्ध हम पूरी मुस्तैदी से लड़ रहे हैं और अपेक्षाकृत सफल हो रहे हैं।अन्य विकसित देशों के मुकाबले हमारे देश में मृत्यु दर काफी कम है।

श्री अस्थाना ने कहा कि बाढ़ के संकट काल में सरकार के स्तर पर संवेदनशील तरीके से बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत कार्य किये गए,इसके लिए सरकार बधाई की पात्र है।सरकार द्वारा चलाये गए सामुदायिक किचेन के एक समय तक चलने के बाद बंद हो गए।उसके बाद एक ओर जहां चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह आयोजन समिति द्वारा सामुदायिक किचेन संचालित हो रहे हैं वहीं दोसरी तरफ सांसद मोतिहारी के सौजन्य से उपलब्ध कराए गए सूखे खाद्य सामग्री का वितरण लगातार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र की सरकार ने किसानों की परेशानियों का ख्याल करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की छठी किस्त की राशि 17 हजार करोड़ रुपये किसानों के खाते में भेज दी गई है।लगभग डेढ़ साल के अंदर अबतक किसानों के खाते में एक लाख 2 हजार करोड़ की राशि भेजी जा चुकी है।एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चरल फंड के रूप में प्रधानमंत्री ने एक लाख करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया है।इस राशि से किसानों को 10 वर्षों तक वित्तीय सहायता प्राप्त होगी।कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस,साइलो,ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग यूनिट लगाकर किसान इसका लाभ लेंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी किसानों बीके बाढ़ में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए आंकलन करा रही है।साथ ही सभी बाढ़ पीड़ित परिवारों के खाते में भी छह हजार रुपये भेजे जा रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता द्वय अरुण कुमार गुप्ता एवं संजीव सिंह सहित मीडिया प्रभारी गुलरेज शहजाद उपस्थित थे।

पूर्वी चंपारण मोतिहारी

जिलाधिकारी श्री शीर्षत कपिल अशोक ने चकिया अनुमंडल अस्पताल स्थित 60 वेड वाले आइसोलेशन सेंटर डीसीएचसी का उद्घाटन किया . वहां लगाए गए वेड ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सी पल्स मीटर एवं अन्य सुविधाओं का  निरीक्षण किया……

जिलाधिकारी ने अनुमंडल के सभी वार्डो का मुआयना किया . डॉक्टरों को जिलाधिकारी ने बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था मुकम्मल बनाए रखने का दिशा निर्देश दिया……

वहां के ए एन एम संस्थान में भी आइसोलेशन सेंटर हेतु सभी सुविधाओं युक्त ऑक्सीजन सिलेंडर ,ऑक्सी पल्स मीटर एवं अन्य मेडिकल फैसिलिटी के साथ सिविल सर्जन को वेड लगाने काआवश्यक दिशा निर्देश दिया ……

एनआरसी का भी निरीक्षण किया ,उसे भी सभी सुविधाओं समेत वेड लगाने हेतु आइसोलेशन सेंटर में तब्दील करने का अनुमंडलीय अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट को आवश्यक दिशा निर्देश दिया ……

नये आइसोलेशन सेंटर हेतु पारा मेडिकल स्टाफ देने का सिविल सर्जन, डीपीएम को  आवश्यक दिशा निर्देश दिया……

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आज पटना में छात्रसंगठन आइसा के द्वारा आइसा के राष्ट्रीय प्रतिरोध दिवस के तहत प्रदर्शन किया ,नई शिक्षा नीति वापस लो-शिक्षा का बाजारीकरण करना बंद करो-गरीबो-मध्यमवर्गीय को शिक्षा से वंचित करने का प्रयास नही चलेगा नारो के साथ.

सभा को संबोधित करते हुए आइसा के राज्य सह सचिव आकाश कश्यप ने कहा कि मोदी सरकार के द्वारा रात के अंधेरे में और बिना सदन में चर्चा किये हुए मोदी सरकार जो नई शिक्षा नीति लाए है इसके खिलाफ पूरे देश मे आज प्रदर्शन हो रहे है इस शिक्षा नीति का जब हम अध्य्यन करते है तो यह शिक्षा नीति गरीबों-मध्यमवर्गीय परिवार से शिक्षा वंचित करने वाली नीति है कुल मिलाकर जिसके पास पैसे रहेंगे वह शिक्षा ले पाएंगे दूसरी ओर उच्च शिक्षा पे हमला है शोध को कमजोर करने वाली नीति है जब देश मे शोध ही नही होगा तो भारत कैसे बनेगा

विश्वगुरु यह भारत का नौजवान पूछता है मोदी जी से इसलिए आइसा का साफ साफ मानना है यह शिक्षा नीति छात्र विरोधी नीति है आज से हमलोगों ने आंदोलन की शुरुवात किये है आने वाले दिनों में तमाम संगठन को एकजुट करके इसके खिलाफ जबरदस्त आवाज बुलंद करेंगे ,आकाश कश्यप ने कहा बिहार बाढ़ और कोरोना के जेहन में आईआईटी जेईई-नीट परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी परीक्षा का डेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं आइसा इस पेंडेमिक समय में छात्रों के मांग के साथ खड़ा है दूसरी तरफ बिहार में इंटर में एडमिशन चल रहा है आइसा ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को लेटर भेज कर मांग किया है कि एडमिशन का डेट बढ़ाया जाए और सहूलियत के साथ तमाम छात्रों का एडमिशन हो!

आज के प्रदर्शन मे आलोक यादव,मॉडल दीपू राज, सुमित जयसवाल,दीपक यादव,बसंत,जिनिश यादव,साहिल जैसवाल,आकाश नयन,रोहित गौतम,राहुल कुमार,रौशन सहित दर्जनों छात्र थे!

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी ने कहा कि बिहार कांग्रेस का बड़ा स्वर्णिम इतिहास रहा है। भारत में सभी बड़े बदलाव की शुरूआत बिहार से ही होती है। उन्होंने कहा यह आज की बात नहीं है हजारों साल से चली आ रही है, स्वतंत्रता आंदोलन की शुरूआत भी गांधी जी ने पश्चिमी चम्पारण से की थी। किसी भी अत्याचार, नफरत, भ्रष्टाचार एवं क्रोध के खिलाफ लड़ाई की शुरूआत बिहार की धरती से ही होती है। आज के संदर्भ में यह काम बिहार में कांग्रेस ही कर सकती है। यह काम मिलकर करना होगा एक दूसरे की इज्जत और प्रतिष्ठा का ख्याल रखते हुये सारी विपक्षी ताकतों को एक साथ एक मंच पर लाने का काम कांग्रेस का है।

हमने फरवरी में कोरोना सुनामी की चेतावनी दी थी, आज आप देख रहे हैं कि कोराना के मामले में हम विश्वगुरू बनने जा रहे हैं। आज फिर मैं कह रहा हूँ कि बिहार एवं पूरा भारत आने वाले छ: महिने, साल भर के अंदर इससे भी बड़ा तूफान का सामना करने जा रहा है, वह है बेरोजगारी का, डूबती अर्थ व्यवस्था का। इसका कारण यह है कि मोदी जी ने और आर एस एस ने मिलकर हमारी संस्थागत ढाँचों को ध्वस्त कर दिया है जिसे कांग्रेस ने बनाया था। पूरे भारत में आज संवैधानिक ढाँचे ध्वस्त हो चुके हैं। हमारी युवा शक्ति जाया होगी। पर यह देश फिर खड़ा होना जानती है। ढाँचा, रोजगार, अर्थ व्यवस्था को फिर खड़ा हो सकता है लेकिन प्यार से नफरत से नहीं और यह काम सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है।

प्रधान मंत्री झूठ बोलते हैं, हमारे सैनिकों के बलिदान का भी उनको ख्याल नहीं है। कहते हैं चाइना भारत की जमीन पर नहीं घुसा है? यह कह कर हमारे बिहार रेजिमें के मारे गये बीस सैनिकों का यह अपमान ही तो कर रहे हैं। सीमा पर संकट के समय बिहार रेजिमेंट आगे बढ़कर दुश्मनों से लोहा लेता है। प्रधानमंत्री जी का पोल खुल चुका है उनके ही रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टी कर दी की चाइना हमारी जमीन के अंदर घुसा है। मैंने जब यह सुना कि चाइना ने हमारा हमीन हड़प लिया और हमारे बीस जवानों को शहीद कर लिया तो गुस्से से मेरा खून खौल गया।

हम यहाँ यह भी बताना चाह रहे हैं कि सुशासन की बात करने वाले हमारे मुख्य मंत्री, विकास की बात करने वाले मुख्यमंत्री आज चुप क्यों हैं, उनकी जनता त्राहिमाम कर रही है। उनकी निष्क्रियता जग जाहिर हो चुकी है।

आज हम यहाँ यह कहना चाहते हैं कि अगली सरकार बिहार में हमारी होगी। हम मिलजुल कर सरकार बनायेंगे। बदलाव अब बिहार से शुरू होगा। हमारे मुख्य मुद्दे हैं रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य। रोजगार बड़े एवं लघु उद्योगों से मिलेगा। बिहार की शक्ति को फिर से संजोना पड़ेगा। प्यार और इज्जत से सहयोगी बनाना होगा और मिलकर निर्णय लेना होगा।

उन्होंने बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल एवं प्रदेश अध्यक्ष को यह निर्देश दिया कि शीघ्र सीटों के बँटवारे के मामले पर बातचीत कर उसे अंतिम स्वरूप दें। सारे विपक्ष से बात करें और चुनाव की लड़ाई शुरू करें।

कोरोना काल में सबसे ज्यादा बिहार सरकार असफल रही है। मजदूरों के बारे में यह सरकार बात नहीं करती, भ्रष्टाचार के बारे में बात नहीं करती,

में बात नहीं करती, बेरोजगारों के बारे में बात नहीं करती, हम करेंगे, कांग्रेस करेगी, बिहार कांग्रेस के साथ पूरा विपक्ष मिलकर करेगी और इस सरकार के खिलाफ लड़ेगी लेकिन सकारात्मक दृष्टिकोण एवं उपागम से।

श्री राहुल गाँधी आज सुबह 11.00 बजे प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, अभियान समिति के अध्यक्ष, कांग्रेस सांसद एवं पूर्व सांसद, विधायक एवं पूर्व विधायक, प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पदाधिकारी, जिला कांग्रेस कमिटी एवं प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष, मोर्चा संगठनों के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को वीडिया संवाद से सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के महासचिव (संगठन) श्री के0सी0 वेणुगोपाल, एम०पी०, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल एम०पी०, प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी बीरेन्द्र सिंह राठौड़, श्री अजय कपूर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री तारिक अनवर एवं शत्रुघ्न सिन्हा, आई0टी0 विभाग के अध्यक्ष रोहण गुप्ता, प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा, कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता सदानन्द सिंह, प्रदेश कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह एम०पी०, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष डा0 अशोक कुमार, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, डा0 समीर कुमार सिंह, पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार के अलावे कांग्रेस के विधायक, पूर्व विधायक उपस्थित थे।

__श्री राहुल गाँधी ने बिहार के कांग्रेसजनों का आह्वान किया कि वे बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा करें और बाढ़ प्रभावित लोगों को यथासम्भव सहायता पहुँचाये। उन्होंने कहा कि देश के साथ बिहार में भी कोरोना वायरस बड़ी तेजी से फैल रहा है तथा हमें इस पर भी नजर रखनी है।

देश में बढ़ती बेरोजगारी एवं अर्थव्यवस्था पर निशाना साधते हुए श्री राहुल गाँधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के शासनकाल में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया था, जबकि देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी के 2014 के लोकसभा चुनाव में 2 करोड़ युवाओं को प्रत्येक वर्ष नियोजित करने का वायदा किया था लेकिन आज देश में बिगड़ती अर्थ-व्यवस्था एवं दीर्घकालीन लाकडाउन के चलते बेरोजगार युवाओं की फौज लगातार बढ़ रही है।

श्री राहल गाँधी ने कहा कि बिहार में लाकडाउन कोरोना वायरस एवं बाढ के कारण वे कांग्रेसजनों से वर्चुअल संवाद स्थापित कर रहे हैं लेकिन आनेवाले समय में वे बिहार का व्यापक दौरा करेंगे एवं जिला एवं प्रखण्ड तक जायेंगे।

इससे पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के महासचिव (संगठन) श्री के0सी0 वेणुगोपाल एम०पी०, अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 मदन मोहन झा ने कहा कि श्री राहुल गाँधी देश के भविष्य हैं और उनकी ही नहीं बल्कि बिहार के कांग्रेसजनों की भावना का आदर करते हुए उन्हें कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व संभालना चाहिए.

इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल एम0पी0 एवं संगठन के महासचिव के0सी0 बेणुगोपाल एम0पी0 ने कांग्रेस पार्टी की डिजिटल सदस्यता अभियान की समीक्षा की और इसमें तेजी लाने का निर्देश दिया।

इस अवसर पर इस वर्चुअल संवाद को कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता सदानन्द सिंह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सचिव बीरेन्द्र सिंह राठौर, अजय कपूर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री तारिक अनवर, शत्रुघ्न सिंहा, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष डा0 अशोक कुमार, श्याम सुन्दर सिंह धीरज, डा0 समीर कुमार सिंह एम0एल0सी0, पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार, शकील उज्जमा अन्सारी ने भी सम्बोधित किया।

इस अवसर पर वर्चुअल संवाद में सदाकत आश्रम में प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष एच0के0 वर्मा एवं प्रवक्ता राजेश राठौड़ भी शामिल रहे।

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मोदी कैबिनेट द्वारा नई शिक्षा नीति को पारित कर दिया गया है। जहां एक ओर सरकार का कहना है की नई शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को आसान बनाना है वहीं अगर नई शिक्षा नीति का गहराई से अध्ययन किया जाए तो इस नीति का उद्देश्य सरकार के दावों के ठीक विपरीत दिखाई देता है। नई शिक्षा नीति समाज में सामाजिक एवं आर्थिक रूप से हाशिए पर स्थित समुदायों को बहिष्कृत करने की नीति है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का आधार प्रधानमंत्री का इस साल का सबसे मशहूर जुमला “आत्मनिर्भर” है। नई शिक्षा नीति के उद्देश्य एवं सिद्धांत अधिकार आधारित दृष्टिकोण की बजाए कर्तव्य आधारित दृष्टिकोण की तस्वीर पेश करते हैं। अर्थात सरकार अपने शिक्षा सुनिश्चित करने के दायित्व से पीछे हटकर यह कार्य प्राइवेट सेक्टर को सौंप रही है साथ ही निजी क्षेत्रों को विचारों को नियंत्रित करने का अधिकार दे रही है।

उच्च शिक्षा में मल्टीपल एग्जिट प्वाइंट (अर्थात 4 साल के ग्रेजुएशन को पहले, दूसरे अथवा तीसरे वर्ष में भी छोड़ देने पर सर्टिफिकेट) एडवांस सर्टिफिकेट इत्यादि के प्रबंध को नई शिक्षा नीति का आकर्षण बिंदु बनाकर इस नीति को एक बड़े सकारात्मक बदलाव के रूप में पेश किया जा रहा है, किंतु वास्तविकता तो यह है कि इस तरह का प्रावधान अंततःअसमानता को ही बढ़ावा देगा। इस तरह की नीति गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को और अधिक हाशिए पर ढकेलेगी तथा शिक्षा का अधिकार एक विशेषाधिकार बनकर रह जाएगा। यह नीति अकादमिक एकरूपता के जरिये से विचारों को नियंत्रित करने की भी कोशिश है। तदनुसार आम परीक्षाओं एवं प्रशासन पर केंद्र का नियंत्रण है किंतु निजी एवं सार्वजनिक संस्थानों को लोगों का शोषण करने की पूर्ण वित्तीय स्वतंत्रता है।

नई शिक्षा नीति का केवल एक ही प्रयोजन है और वह है निजी संस्थानों को बढ़ावा देना। इस नीति द्वारा सरकार अपने इस मंसूबे को स्कूल तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी तथा सार्वजनिक-परोपकार की साझेदारी का चोगा ओढ़ा रही हैl एनईपी निजी कंपनियों और सरकार को सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह नहीं ठहराती है । देश में लंबे समय से छात्र आंदोलनों की निजी शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक रूप से अनिवार्य आरक्षण और सकारात्मक कार्रवाइयों की नीतियों को लागू करने की मांग के बावजूद एनईपी में इसका जिक्र तक नहीं है।

एनईपी संविधान के संघीय ढांचे पर भी हमला हैl शिक्षा समवर्ती सूची में है तथा परामर्श और समन्वय की मांग करता है, एकरूपता की नहीं ।इसी तरह, नीति का प्रारूप ऑनलाइन शिक्षा और शिक्षण में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने की बात करता है, लेकिन छात्रों के लिए इस प्रौद्योगिकी की पहुंच और सामर्थ्य का विस्तार कैसे होगा यह सुनिश्चित करने में विफल है ।

एनईपी स्पष्ट रूप से सरकार द्वारा यह दावा करने कि शिक्षा पर खर्च में वृद्धि होगी इस विषय पर चर्चा नहीं करती कि यह होगा कैसे। निवेश और व्यय का बोझ “निजी परोपकार” साझेदारी के माध्यम से निजी कंपनियों और व्यक्तियों पर है, जो स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों के कॉर्पोरेट अधिग्रहण के लिए एक चोगा मात्र है ।

सरकार स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों स्तर पर स्व-नियमन को बढ़ावा देकर शिक्षा क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी त्याग कर निजी कंपनियों को बढ़ावा दे रही है। एनईपी बड़े स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पक्ष में छोटे स्कूलों और कॉलेजों को बंद करना प्रस्तावित करता है, जो सार्वजनिक वित्त पोषित शिक्षा को नष्ट करने के अलावा कुछ भी नहीं है ।

स्कूल शिक्षा:
एनईपी स्कूल शिक्षा में मौजूदा 10 + 2 संरचना को “एक नए शैक्षणिक और पाठयक्रम पुनर्गठन” के साथ 5+ 3+3+4 में बदलने का प्रस्ताव रखता है और इस संरचना में 3 से 18 वर्ष के छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगे। एनईपी का तर्क है कि वर्तमान 10+2 संरचना 3-6 आयु वर्ग के बच्चों पर ध्यान नहीं देती है क्योंकि औपचारिक शिक्षा कक्षा 1 में शुरू होती है और वह 6 साल की उम्र में शुरू होती है। इसलिए नई 5+3+3+4 संरचना, 3 साल की उम्र से अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) प्रदान करेगी।

ईसीसीई की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्रों की है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, खेलने के उपकरण और अच्छे बुनियादी ढांचे की व्यवस्था की जाएगी। यहां तक कहा गया है कि 10+2 और उससे अधिक की योग्यता वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/शिक्षकों को ईसीसीई में 6 महीने का प्रमाण पत्र कार्यक्रम दिया जाएगा; और कम शैक्षिक योग्यता वाले लोगों को एक वर्ष का डिप्लोमा कार्यक्रम दिया जाएगा। बच्चों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीटीएच चैनलों का इस्तेमाल और डिजिटल/दूरी के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल प्रस्तावित किया गया है ।

हालांकि, दस्तावेज अनुबंध, मानदेय आधारित कार्य के बजाय स्थायी नौकरी की गारंटी देने में विफल हैl स्थायी नौकरी तो दूर की बात है, न्यूनतम वेतन की गारंटी भी नहीं है। डिजिटल डिवाइड के सवाल पर यह दस्तावेज यह नहीं बोलता कि इससे उन लोगों तक डिजिटल पहुंच कैसे बढ़ेगी, जिनके पास टीवी, बिजली, इंटरनेट, स्मार्ट फोन या गैजेट्स तक नहीं है। इंटरनेट की पहुंच राष्ट्रीय स्तर पर केवल 40% है और ग्रामीण क्षेत्र और भी हाशिए पर हैं ।

एनईपी का तर्क है “प्रशिक्षित सहायककर्मी (स्थानीय समुदाय से व उसके बाहर दोनों) “, उसके अतिरिक्त सहायता सत्र, कैरियर मार्गदर्शन से संबंधित मुद्दों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की देखरेख और सुरक्षा पहलुओं को देखते हुए “एक पर एक सहकर्मी ट्यूशन” की व्यवस्था की जाए। साफ तौर पर सरकार सार्वजनिक शिक्षा में गुणवत्ता और सस्ती शिक्षा प्रदान करने की अपनी जिंमेदारी से दूर रहना चाहती हैl

सरकार की अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश:
नई शिक्षा नीति निजीकरण शब्द के इस्तेमाल से बचते हुए सरकार द्वारा शिक्षा से जुड़ी हुई अपनी सभी जिम्मेदारियों को त्याग कर निजी संस्थानों को जनता का आर्थिक शोषण करने की सुविधा उपलब्ध कराने का नाम है। यह नीति निजीकरण को सार्वजनिक-परोपकार साझेदारी का नाम देकर शिक्षा जैसी मूलभूत जिम्मेदारी से सरकार का पल्ला झाड़ लेना है।

अन्य भाषाओं पर संस्कृत का वर्चस्व:
अन्य भाषाओं को नजरअंदाज करते हुए संस्कृत संवर्धन पर अत्यधिक जोर देना मोदी सरकार की संस्कृत के वर्चस्व को स्थापित करने की मंशा को स्पष्ट करता है। दस्तावेज में अन्य भाषाओं की बात जरूर की गई है किंतु संस्कृत पर दिया गया अत्यधिक जोर सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। इसी प्रकार भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली और प्रथाओं पर सरकार का अत्यधिक ध्यान बाद में देश के विभिन्न चरणों में विकसित अन्य प्रथाओं को नजरअंदाज और अस्वीकार करने का प्रयास जैसा लगता है। “जहां भी संभव हो, कम से कम ग्रेड 5 तक लेकिन अधिमानतः ग्रेड 8 और उससे आगे तक अनुदेश का माध्यम घर की भाषा/मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा होगीl” यह शिक्षा के माध्यम में एक व्यवस्थित परिवर्तन है और शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षा सामग्री की गुणवत्ता और यह भी कि इसे कैसे लागू किया जाएगा, पर सवाल उठते हैं। सार्वजनिक तथा निजी दोनों संस्थानों में इस प्रकार मातृभाषा को अनिवार्य बनाना विद्यार्थियों को उस भाषा में शिक्षण लेने से वंचित करता है जिसमें वे शिक्षित होना चाहते हैं।

सरकारी स्कूलों को बंद करना:
एनईपी 2020 स्कूल कॉम्प्लेक्स नामक समूह संरचना के नाम पर सरकारी स्कूलों को “सुनियोजित ढंग से” बंद करने को बढ़ावा देता है। जिसमें स्कूलों में कम नामांकन अनुपात स्कूल बंद होने का कारण दिखाया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में कम नामांकन अनुपात का कारण वास्तव में सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता की कीमत पर निजी स्कूलों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देना और स्कूली शिक्षा से संबंधित शिक्षण, अधिगम और बुनियादी ढांचे के मुद्दों में सार्वजनिक निवेश की कमी है। त्रुटिपूर्ण नीति को ठीक करने के बजाय एनईपी 2020 सरकारी स्कूलों को बंद करने को बढ़ावा देता है।

निजी स्कूलों को आर्थिक शोषण की खुली छूट:
एनईपी ने आवश्यक गुणवत्ता मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रीस्कूल एजुकेशन-निजी, सार्वजनिक और परोपकारी सहित शिक्षा के सभी संस्थानों के लिए स्व-नियमन या प्रत्यायन प्रणाली का प्रस्ताव दिया है। राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) नामक एक स्वतंत्र, राज्यव्यापी निकाय की स्थापना की जाएगी। यह और कुछ नहीं बल्कि सरकार द्वारा गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों पर छोड़ने के लिए एक आवरण है जैसा कि सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी किया गया है ।
उच्च शिक्षा:
समरूपता और अकादमिक स्वतंत्रता का केंद्रीकरण:
सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और संस्थानों के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा परीक्षाओं के संचालन का केंद्रीकरण हालांकि आदर्श लगता है, लेकिन वास्तव में यह कॉलेजों/विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता से वंचित करता है। फिलहाल, एनईपी बोझ को कम करने की बात करता है किंतु NEET तथा अन्य अखिल भारतीय परीक्षाओं का NTA अथवा अन्य एजेंसियों द्वारा केंद्रीकृत आयोजन नई समस्याओं को जन्म देगा।

सार्वजनिक वित्त पोषित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को बंद करना:
स्कूल शिक्षा की तरह ही एनईपी मे 3000 या उससे अधिक छात्रों के बड़े बहुविषयक विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और एचईआई क्लस्टर/नॉलेज हब का गठन प्रस्तावित करती है। इसका स्पष्ट अर्थ है- बड़े बहुविषयक विश्वविद्यालयों के पक्ष में छोटे या मध्यम सरकारी वित्त पोषित विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों या संस्थानों को बंद करना। सबसे नृशंस रूप से, यह दस्तावेज नालंदा और तक्षशिला के संदर्भ का उपयोग बड़े विश्वविद्यालयों के निर्माण के लिए कॉलेजों को बंद करने के अपने बुरे इरादों वाले तर्क को न्यायोचित ठहराने के लिए करता है ।

पुनर्गठन के नाम पर सार्वजनिक वित्तपोषण का निजीकरण अथवा समापन:
ये उच्च शिक्षा संस्थान (एचईआई) भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) द्वारा शासित होंगे । एचईसीआई के तहत एचईआई के प्रत्येक मुद्दे से संबंधित विभिन्न इकाइयां होंगी जो संरचना का हिस्सा होंगी। राष्ट्रीय उच्च शिक्षा नियामक परिषद (एनएचईआरसी) शिक्षक शिक्षा सहित उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एकल बिंदु नियामक होगा केवल चिकित्सा और कानूनी शिक्षा इसके अंतर्गत नहीं होंगे। दूसरी संस्था ‘Meta-Accrediting Body’ (जिसे मान्यता के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी) कहा जाता है) होगी। तीसरा उच्च शिक्षा अनुदान परिषद (एचईजीसी) होगा, जो फंडिंग नियमित करेगा । चौथी संस्था होगी जनरल एजुकेशन काउंसिल जोकि अकादमिक स्तर को बेहतर बनाने का कार्य करेगी। इसका तकनीकी रूप से अर्थ है यूजीसी और अन्य मौजूदा निकायों को खत्म किया जाएगा।

इन एचईआई की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) करेंगे। बीओजी के पास फीस पर फैसला करने, एचईआई के प्रमुख सहित नियुक्तियां करने और शासन के बारे में निर्णय लेने का अधिकार होगाl शासन का यह मॉडल स्वायत्तता और अकादमिक उत्कृष्टता को केंद्रीकृत और नष्ट कर देगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा अनुसंधान के वित्तपोषण के समन्वय के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान कोष की स्थापना की जाएगी। यह समन्वय स्वायत्त वित्तपोषण व्यवस्था को नियंत्रित करने के अलावा कुछ नहीं हैl

एनईपी में यह भी कहा गया है कि निजी और सार्वजनिक संस्थानों के बीच कोई अंतर नहीं होगा, जो सार्वजनिक संस्थानों के वित्तपोषण से सरकार के पीछे हटने का संकेत देता है । इस बीच, एक स्वायत्त डिग्री देने वाले कॉलेज (एसी) उच्च शिक्षा के एक बड़े बहुविषयक संस्थान का गठन होगा जो स्नातक की डिग्री प्रदान करेगा और मुख्य रूप से स्नातक शिक्षण पर केंद्रित होगा, हालांकि यह उस तक सीमित नहीं रखा जाएगा और यह आम तौर पर एक आम विश्वविद्यालय से छोटा होगा ।

शिक्षा के भीतर सामाजिक भेदभाव का कोई संज्ञान नहीं, सामाजिक न्याय के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं:
यह वही भाजपा की सरकार है जिस के शासन में पूरे देश ने रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या के विरोध में एक व्यापक आंदोलन देखा । रोहित के लिए न्याय की मांग करते हुए इस आंदोलन में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हाशिए के समाज से आने वाले विद्यार्थियों के प्रति होने वाले भेदभाव तथा उत्पीड़न की ओर सभी का ध्यान केंद्रित किया गया। और आज यही भाजपा की सरकार नई शिक्षा नीति पारित कर रही है जिसमें शैक्षिक संस्थानों में होने वाले भेदभाव एवं उत्पीड़न के विषय में कोई बात नहीं की गई है। नई शिक्षा नीति संस्थागत उत्पीड़न एवं भेदभाव को वंचित एवं हाशियाकृत विद्यार्थियों की समस्या की तरह देखती है और सरकार को संस्थानों में समता एवं न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से दूर रखती है।

वर्गीकृत असमानता और बच्चों को पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर करना:

एनईपी से 4 वर्षीय बहुविषयक बैचलर कार्यक्रम एक आपदा होगा जैसा कि हमने दिल्ली विश्वविद्यालय में FYUP प्रणाली के साथ देखा है। जिसका न केवल छात्रों और शिक्षकों ने विरोध किया बल्कि अंततः शिक्षा और शिक्षा देने में विफल रहने पर प्रशासन को भी इसे वापस लेना पड़ा। उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री/एग्जिट का मतलब है कि अच्छी फाइनेंशियल कंडीशन वाले स्टूडेंट्स ही अपनी डिग्री पूरी कर पाएंगे । गरीब छात्रों को डिप्लोमा से ही समझौता करना होगा। साथ ही एक साल में सर्टिफिकेट, 2 साल में डिप्लोमा, 3 साल में बैचलर मूल रूप से डिग्रियों का अवमूल्यन है क्योंकि इन डिग्रियों को लेने के लिए मजबूर किसी को भी पढ़ाई बीच में छोड़ने वाला माना जाएगा। यदि इन पाठ्यक्रमों को अलग नहीं कर रहे हैं, और एक बड़े 4 साल मॉड्यूल का ही हिस्सा सर्टिफिकेट डिप्लोमा तथा बैचलर हैं, तो यह डिग्रियों का अवमूल्यन ही है।

निजी विश्वविद्यालयों को फण्ड एवं बढ़ावा देने वाली एक नीति:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समय समय पर शिक्षा में निजी निवेश एवं परोपकार की ‘महत्ता’ पर बल देती है। यह न केवल निजी निवेश एवं परोपकारी उद्यमों को आमंत्रण है जिससे कि वे उच्च शिक्षा में अपने व्यापार को बढ़ा सकें, बल्कि ये ऐसे उच्च शिक्षा संस्थानों को सरकारी सहायता का भी वादा करती है। हम सभी जानते हैं कि ऐसे परोपकारी उच्च शिक्षा संस्थान कौन होंगे। यह उच्च शिक्षा के निजी एवं कॉरपोरेट नियंत्रण की व्यंजना ही है।
पहले तो नीति नए उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए कम नियंत्रण का वायदा करती है। जबकि एक और स्तर और मानकों के नाम पर, राष्ट्रीय शिक्षा नीति सरकारी वित्त पोषित संस्थानों को बंद करने का एक यंत्र है, वहीं दूसरी ओर यह नए विश्वविद्यालयों को खोलने में गुणवत्ता और स्तर की चिंता न करने का वायदा करता है। इससे इतर, शुल्क निर्धारण के प्रगतिशील राज को प्रोत्साहित करके यह नीति स्पष्ट तौर पर उच्च शिक्षा में शुल्क वृद्धि और बहिष्करण का सृजन कर रही है।

स्वायत्तता के नाम पर शुल्क वृद्धि और स्ववित्तपोषण को लागू करना:
महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के पास श्रेणीबद्ध स्वायत्तता होगी। प्रत्यायन की श्रेणियाँ किसी संस्थान की स्वायत्तता निर्धारित करेंगी। कोई संस्थान जिसकी प्रत्यायन की श्रेणी उच्च होगी वह शुल्क वृद्धि कर सकेगा, इस प्रकार गरीबों और वंचितों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से बहिष्कृत कर दिया जायेगा क्योंकि विश्वविद्यालय निश्चित तौर पर नये स्व-वित्तपोषी पाठ्यक्रम लायेंगे जिससे कि वे स्वयं ही फण्ड इकट्ठा कर सकें। यह पहले ही कुछ समय से कार्य में लाया जा चुका है, जैसे कि यूजीसी का परिसमापन और HEFA ऋणों की स्वीकृति को पहले ही मूर्त किया जा चुका है।

निजी विश्वविद्यालयों को शोषण की स्वतंत्रता:
स्वविनियमन की प्रणाली निजी विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करेगी जहाँ संस्थान को शिक्षा, सीखने, अवस्थापना, शुल्क एवं अन्य मुद्दों पर स्व-घोषणा देनी होगी। इस प्रकार यह सरकार के नियंत्रण का अंत करेगी। यह उच्च शिक्षा में भयंकर परिणामों की ओर लेकर जाएगी जिसमें निजीउद्द्मियों को फ़ीसवृद्धि करने औऱ गरीबों एवं वंचितों के बहिष्कृत करने में कोई रोक-टोक नहीं होगी।

ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर डिजिटल डिवाइड और बहिष्करण मजबूत करना:
शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षा शुरू करने पर जोर दिया गया है। यह और कुछ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था से समाज के हाशिए पर स्थित समुदायों से आने वाले विद्यार्थियों को बाहर करने की नीति है। यह नीति इस बारे में बात नहीं करती है कि यह कैसे इंटरनेट पहुंच बढ़ाएगी, डिजिटल डिवाइड को कम करेगी और शिक्षा की पहुंच, और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। इसी तरह, दूरस्थ शिक्षा पर जोर शिक्षा के विचार के खिलाफ जाता है। NEP एक स्वायत्त निकाय, नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (NETF) बनाने की बात करती है,जो “उच्च शिक्षा, मूल्यांकन, नियोजन, प्रशासन स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों के लिए” प्रदान करेगा। हालाँकि नीति यह बात नहीं करती है कि यह डिजिटल विभाजन को कैसे समाप्त करने जा रही है। यह ऐसी शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल गैजेट्स की पहुंच को कैसे बढ़ाएगीl नीति फंडिंग के विषय में कुछ स्पष्ट नहीं करती जिसका सीधा अभिप्राय यह है कि इसका भार विद्यार्थियों पर थोप दिया जाएगा और निजीकरण के लिए मार्ग प्रशस्त होगाl

एमफिल को खत्म करना और एकीकृत कार्यक्रम में एमए की अवधि को कम करना केवल मोदी सरकार के शोध के प्रति समझ की कमी को दर्शाता है । एमफिल प्रशिक्षण का मैदान है और अनुसंधान की गुणवत्ताको बढ़ाने में इसका महत्व है। एमफिल को हटाकर सरकार ने भारत में रिसर्च को फंडिंग और सपोर्ट कम करने के अपने इरादे का संकेत दिया है। “शैक्षणिक मार्ग” के बारे में नई नीति का मूल रूप से मतलब है (भले ही यह बेहतर पाठ्यक्रमों को डिजाइन करने और एक बेहतर शिक्षक होने की गुंजाइश देता है) शिक्षक बुनियादी कक्षाएं ले सकते हैं और प्रशासन/शासन में पद सुनिश्चित करने की सीढ़ी पर आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं । यह विश्वविद्यालय प्रणाली में शिक्षण की स्वायत्त प्रकृति को खत्म करने तथा सरकार के हुक्म के अनुसार चलने की व्यवस्था को सुनिश्चित करने की ओर एक कदम है।

समावेश के नाम पर यह नीति वास्तव में, बहिष्कार के लिए नीति के अलावा कुछ नहीं है। AISA इस शिक्षा विरोधी मसौदे को खारिज करता है और मांग करता है कि इसे तुरंत वापस लिया जाए और संसद में इस पर चर्चा की जाए।

जनबोल न्यूज

जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव एवं राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद ने मुल्क, सुबा बिहार और खास तौर से मुस्लिम भाई-बहनों को ईद-उल- अज़हा की मुबारकबाद और बधाई दी है । और कहा कि कुर्बानी का यह त्योहार, त्याग ,समर्पण और कुर्बानी के साथ-साथ एक दूसरे से मोहब्बत का पैगाम भी देता है।

मालूम हो कि इस्लाम धर्म के मानने वाले तमाम लोग हज़रत इब्राहिम (अस) के द्वारा अल्लाह के खुशनुदी में सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने की याद में सुन्नत की अदायगी के लिए जानवरों की कुर्बानी खुदा के हुज़ूर मे पेश करते हैं । और इस बात का अहद करते हैं कि अल्लाह उनकी कुर्बानी और त्याग को कुबूल फरमाए ।

नेताओं ने तमाम लोगों से अपील और इल्तजा कि है कि कोरोना वायरस जैसी वबा से तमाम इंसानों की हिफाज़त के लिये नमाज़ में दुआ करें। और अल्लाह ताला कोरोना वायरस जैसी महामारी से मुल्क और सुबा बिहार के लोगों को परेशानियों और मुसीबतों से छुटकारा दे। साथ ही मूल्क और सुबा के तमाम लोगों के साथ कौमी एकता और भाईचारे के साथ इस पर्व को मनाने की अपील की है। साथ ही साथ वबा से बचने के लिए फिजिकल डिस्टेंस का ख्याल रखने की भी अपील की है।

जनबोल न्यूज

आज यानि  30 जुलाई को पटना के स्लम एरिया दीघा बिधान सभा और बाँकीपुर बिधान सभा के अन्तर्गत कमला नेहरू नगर में और जहाँ मुस्लिम बहुल्य क्षेत्र  है और हिंदु भाई भी बहुत कस्ट में झुग्गी झोपड़ी बना कर रहते है जहाँ सरकार के द्वारा कोई सुविधा नही है गंदगियों का अंबार है सकरी गली है जहाँ की लोग हजारो की संख्या में रहते है.

वहा बबन यादव ,प्रदेश उपाध्यक्ष ,रालोसपा के नेता द्वारा मास्क बाटने एवम फॉगिंग किया गया ,वहा के लोकल रालोसपा नेता रियाजुद्दीन साहब का भी सहयोग मिला जिन्होने मुझे घर घर गली गलीपूरा कमला नेहरू में घुमाया उनका सुक्रगुजार हु जिन्होंने गरीबो की सेवा करने में मेरा मदद की उनका भी बहुत दिनों से बुलावा से आ रहा था जिसे मैं आज वहां की पूर्ण जनता को संतुष्ट कर दिया और आज ही कदम कुवा छेत्र के शिव मंडी लें गली ,चूड़ी मंडी,जहाजी कोठी ,भटाचार्या रोड पोस्ट ऑफिस गली जहां की डबल सेनेटराइज़ मसीन से खुद सेनेटराइज़ करने का काम किया गया लगातार 2 बजे दिन से संध्या 7 बजे तक कार्यक्रम किया गया ।

जिलाधिकारी श्री शीर्षत कपिल अशोक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसडीओ, एसडीपीओ, अंचलाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी को कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन को प्रभावी ढंग से शक्ति से अनुपालन कराने का  निर्देश दिया..

बकरीद, रक्षाबंधन, 15 अगस्त की विधि व्यवस्था को ले जिलाधिकारी ने की समीक्षा…

जिलाधिकारी ने कहा कि लॉकडाउन का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए मनाये सभी पर्व त्यौहार. जिलाधिकारी ने बाढ़ राहत के कार्यों में तेजी लाने का दिया निर्देश…उक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अनुमंडल, स्वास्थ्य एवं प्रखंड स्तर पदाधिकारी मौजूद थे।