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Sonia Gandhi suggested to ban media ads : यदि माना गया सोनिया गाँधी का प्रस्ताव तो बंद हो सकता है TV और News Paper

जनबोल न्यूज

देश इनदिनों कोरोना महामारी के संकट के दौर से गुजर रहा है।

लगाता सरकारें अलग अलग तरिके से फंड कटौती कर इस महामारी से जुझ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी पार्टी के अध्यक्षों से देश को इस दौड़ से निकालने के लिए  सलाह मांगा था।

सोनिया गाँधी ने भी प्रधानमंत्री मोदी को दो पन्नों का एक पत्र लिखा है।

पत्र में जहाँ संसदों के वेतन को 30 प्रतिशत तक काटने का आग्रह किया है वहीं मीडिया विज्ञापन जो कोविड-19 से संबंधित नहीं है उसे भी बंद करने का प्रस्ताव दिया है।

सोनिया गाँधी द्वारा लिखे गए पत्र की माने तो हर साल केंद्र सरकार 1250 crore प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर खर्च करती है।

यहीं नहीं  सरकारी कंपनीयाँ भी तकरीबन इतना हीं खर्चा अपने विज्ञापन पर करती है यदि फिलहाल दो सालों के लिए यह बंद कर दिया जाए तो बड़े मात्रा में पैसा इक्कठा होगा जिनसे कोविड-19 से लड़ा जा सकता है।

 

यह परेगा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर असर

प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया ज्यादतर सरकारी विज्ञापनों पर हीं टिका है।

ऐसे में सोनिया गाँधी के प्रस्ताव से प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के संगठनों में असंतोष पैदा कर दिया है।

यदि सोनिया गाँधी के प्रस्तावों को मान लिया जाता है तो प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया आर्थिक तंगी की ओर बढ़ सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठन NBA ने की निंदा

न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने सोनिया गाँधी के  प्रस्‍ताव की कड़ी निंदा किया है।

निंदा करते हुए  कहा कि मीडिया कर्मियों के लिए इस तरह का सुझाव मनोबल गिराने वाला है ।

एनबीए के अध्यक्ष रजत शर्मा ने कहा कि हम कांग्रेस अध्यक्ष के इस सुझाव की कड़ी निंदा करते हैं।

ऐसे समय में जब मीडिया कर्मी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सही समाचार पहुंचाने का काम कर रहे हैं, तब कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का सुझाव आना निराशाजनक  है।

 

 

 

 

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